News Next Bihar | पटना
बिहार के हजारों संविदा (Contractual) कर्मचारियों के लिए पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को केवल लंबे समय तक सेवा देने के आधार पर नियमित (पक्की) नौकरी का अधिकार नहीं मिल सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी सेवा में नियमित नियुक्ति केवल संविधान और निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के अनुसार ही की जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
मामले में संविदा कर्मचारियों ने अदालत से मांग की थी कि वर्षों से लगातार सेवा देने के कारण उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि लंबे समय से एक ही विभाग में काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी नियुक्ति नहीं मिली, जबकि वे नियमित कर्मचारियों की तरह ही जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक पदों पर नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समान अवसर और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से ही की जा सकती है। यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति संविदा के आधार पर हुई है, तो केवल लंबे समय तक काम करने से उसे नियमित नियुक्ति का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमितीकरण का आदेश तभी दिया जा सकता है, जब उसके लिए कोई वैधानिक प्रावधान या सरकारी नीति मौजूद हो। न्यायालय सीधे तौर पर संविदा कर्मचारियों को स्थायी नियुक्ति देने का निर्देश नहीं दे सकता।
हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
इस फैसले का असर बिहार के विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों, मिशनों और योजनाओं में कार्यरत हजारों संविदा कर्मचारियों पर पड़ सकता है। लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए यह निर्णय बड़ा झटका माना जा रहा है। अब उनकी उम्मीदें सरकार की नीतियों और भविष्य में बनने वाले नियमों पर निर्भर रहेंगी।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय के पहले से स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप है, जिनके अनुसार सरकारी नौकरियों में नियमित नियुक्ति केवल निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से ही की जा सकती है। हालांकि, यदि राज्य सरकार चाहे तो अलग नीति बनाकर संविदा कर्मचारियों के हित में निर्णय ले सकती है।
मुख्य बातें (Highlights)
- ✅ पटना हाईकोर्ट ने संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग पर बड़ा फैसला सुनाया।
- ✅ केवल लंबे समय तक सेवा देने से पक्की नौकरी का अधिकार नहीं मिलेगा।
- ✅ नियमित नियुक्ति संविधान और भर्ती नियमों के अनुसार ही संभव।
- ✅ फैसले का असर बिहार के हजारों संविदा कर्मचारियों पर पड़ सकता है।









