
नई दिल्ली: भारत के टेक जॉब मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब टेक कंपनियों की भर्ती सिर्फ बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। Tier-2 और Tier-3 शहर तेजी से नए टेक हब के रूप में उभर रहे हैं। सितंबर 2026 में इन शहरों में सक्रिय टेक जॉब ओपनिंग्स करीब 95% सालाना बढ़कर 41 हजार तक पहुंच गईं, जो सितंबर 2025 में लगभग 21 हजार थीं। यह आंकड़ा स्टाफिंग फर्म Xpheno के विश्लेषण के हवाले से सामने आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे शहरों में टेक हायरिंग बढ़ने के पीछे कंपनियों की लागत कम करने की रणनीति, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रतिभा और बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कारण अहम हैं। अहमदाबाद, कोयंबटूर, कोच्चि और इंदौर जैसे शहरों में टेक और डिजिटल भूमिकाओं के लिए कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ रही है। इन शहरों में ऑपरेशनल और रियल एस्टेट लागत अपेक्षाकृत कम होने के साथ कर्मचारियों के बीच attrition भी कम रहने की संभावना कंपनियों को आकर्षित कर रही है।
दिलचस्प बात यह है कि बड़े शहरों में टेक जॉब की मांग में उतार-चढ़ाव के बीच छोटे शहरों ने तेज रफ्तार पकड़ी है। अगस्त 2026 में सामने आई Apna की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में Tier-2 शहरों में जॉब पोस्टिंग 16.1% और Tier-3 शहरों में 30.6% बढ़ीं, जबकि Tier-1 शहरों में यह वृद्धि 7.3% रही। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां अब रोजगार के लिए नए शहरों और नए टैलेंट पूल की ओर तेजी से देख रही हैं।
टेक कंपनियों के लिए यह बदलाव सिर्फ लागत बचाने तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों में बड़ी संख्या में युवा इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा हासिल कर रहे हैं, जबकि रिमोट और हाइब्रिड वर्किंग मॉडल ने कंपनियों के लिए शहरों की भौगोलिक सीमाओं को काफी हद तक कम कर दिया है। Global Capability Centres यानी GCCs के विस्तार से भी Tier-2 और Tier-3 शहरों में टेक रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद बढ़ी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बदलाव भारत के रोजगार बाजार को ज्यादा विकेंद्रीकृत बना सकता है। यदि कंपनियां छोटे शहरों में स्थायी टेक टीमें, ट्रेनिंग सेंटर और डिलीवरी ऑपरेशन स्थापित करती हैं, तो स्थानीय युवाओं को अपने शहर में ही बेहतर करियर विकल्प मिल सकते हैं। इससे बड़े महानगरों की ओर रोजगार के लिए होने वाला पलायन भी कम हो सकता है।
हालांकि, 95% की वृद्धि को पूरे देश में टेक रोजगार की स्थायी दिशा मानना अभी जल्दबाजी होगी। रिपोर्ट में यह भी संकेत है कि छोटे शहरों में शुरुआती आधार अपेक्षाकृत कम होने के कारण प्रतिशत वृद्धि काफी तेज दिखाई दे सकती है। फिर भी मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि भारत का अगला टेक रोजगार विस्तार केवल बड़े महानगरों में नहीं, बल्कि छोटे शहरों में भी दिखाई दे रहा है।













