
पटना: बिहार में गंगा, पुनपुन और दरधा जैसी नदियों के उफान से 19 से अधिक जिलों में करीब 29 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित है। बाढ़ की इस भयावह स्थिति के बीच अब राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है और बिहार की बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की जोरदार मांग उठाई है।
तेजस्वी यादव का केंद्र पर हमला और 7 प्रमुख मांगें तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए केंद्र और राज्य की एनडीए (NDA) सरकार पर बाढ़ पीड़ितों की राहत में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री से तुरंत बिहार का दौरा कर स्थिति का मुआयना करने का आग्रह किया है।
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री के समक्ष 7 मुख्य मांगे रखी हैं:
- राष्ट्रीय आपदा का दर्जा: बिहार में हर साल आने वाली तबाही को देखते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए।
- ₹5,000 करोड़ का विशेष पैकेज: राहत, बचाव और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र तुरंत 5 हजार करोड़ रुपये की सहायता राशि दे।
- वायुसेना (Air Force) की मदद: दियारा और कट ऑफ हो चुके इलाकों में राहत सामग्री की एयर ड्रॉपिंग के लिए सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टर्स तैनात किए जाएं।
- किसान व मजदूर राहत पैकेज: फसलों और मवेशियों के नुकसान से बेहाल किसानों और मजदूरों के लिए अलग से वित्तीय सहायता दी जाए।
- फंड आवंटन की CAG जांच: उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य का आकस्मिकता कोष (Contingency Fund) खाली हो चुका है, जिसकी सीएजी (CAG) से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सरकार का पलटवार: ‘नियंत्रण में है जलस्तर, राहत कार्य जारी’ दूसरी ओर, राज्य सरकार और सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। उप मुख्यमंत्री और जल संसाधन विभाग की ओर से कहा गया है कि सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
सरकार का कहना है कि:
- प्रयागराज और वाराणसी की ओर से पानी का दबाव कम होने के बाद पटना के गांधी घाट और अन्य इलाकों में गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है।
- सभी प्रमुख विभागीय तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं और दियारा क्षेत्रों में शरण स्थलों व कम्युनिटी किचन के जरिए लाखों लोगों को भोजन और सूखा राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
- मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री खुद ग्राउंड जीरो और हवाई सर्वेक्षण के जरिए स्थिति पर 24 घंटे नजर बनाए हुए हैं।
आपदा पर क्यों छिड़ी है रार? बिहार का लगभग 76% भूभाग बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका वाला क्षेत्र है। हर साल सीमावर्ती नेपाल से आने वाले पानी और पड़ोसी राज्यों में भारी बारिश से राज्य को अरबों का नुकसान होता है। विपक्ष का तर्क है कि इसे केवल राज्य की आपदा मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि केंद्र सरकार को आगे आकर इसके स्थायी समाधान और नेपाल वार्ता पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।













