
बिहार सरकार की नई सोशल मीडिया नीति से जुड़ी विस्तृत जानकारी:
नीति का उद्देश्य और मुख्य विशेषता
- डिजिटल आउटरीच: बिहार सरकार अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं, प्रशासनिक फैसलों और विकास कार्यों की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स का सहारा ले रही है।
- पारदर्शिता और तथ्यपरकता: प्रोत्साहन राशि केवल उन वीडियो/कंटेंट के लिए दी जाएगी जो सरकार की योजनाओं पर आधारित, तथ्यपरक और जन-जागरूकता फैलाने वाले हों।
व्यूज के आधार पर भुगतान का ढांचा आज तक और दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिएटर्स को वीडियो पर मिलने वाले व्यूज के हिसाब से भुगतान किया जाएगा:
- 1 लाख व्यूज: 1 लाख प्रामाणिक व्यूज मिलने पर क्रिएटर्स को ₹10,000 तक का इंसेंटिव मिलेगा।
- 10 लाख व्यूज: उच्च गुणवत्ता और अधिक रीच वाले वीडियो पर यदि 10 लाख (1 मिलियन) व्यूज आते हैं, तो क्रिएटर्स को अधिकतम ₹1,000,000 (1 लाख रुपये) तक दिए जा सकते हैं।
- समय सीमा: प्रोत्साहन राशि के आंकलन के लिए वीडियो पोस्ट होने के बाद 30 दिनों के व्यूज की गणना की जाएगी।
पात्रता और नियम
- प्लेटफॉर्म्स: यूट्यूब (YouTube), इंस्टाग्राम (Instagram), फेसबुक (Facebook) और एक्स (X/Twitter) पर सक्रिय बिहार के कंटेंट क्रिएटर्स इसके लिए पात्र होंगे।
- सामग्री की समीक्षा: राज्य का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) कंटेंट की सत्यता और गुणवत्ता की जांच के बाद ही भुगतान की स्वीकृति देगा। फर्जी व्यूज या गुमराह करने वाले कंटेंट को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।












