केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम (मामल्लापुरम) में दक्षिण भारत के मुख्यमंत्रियों की बैठक के दौरान ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) द्वारा पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो अंतरे (stanzas) गाने के फैसले के बाद यह नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

गृह मंत्री अमित शाह का बयान
- राष्ट्र-विरोधी फैसला: अमित शाह ने कांग्रेस के इस कदम को “राष्ट्र-विरोधी” (Anti-national) और “तुष्टीकरण की राजनीति” करार दिया है।
- 1937 की गलती का हवाला: उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 1937 में भी तुष्टीकरण के लिए ‘वंदे मातरम’ के टुकड़े किए थे, जिसने आगे चलकर देश के विभाजन (Partition) और ‘टू-नेशन थ्योरी’ का आधार तैयार किया था।
- नया कानून और पूरा गान: अमित शाह ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार ने कानूनी रूप से सभी सरकारी कार्यक्रमों में पूरा ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य किया है, लेकिन कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में कानून की अनदेखी कर रही है।
- शहीदों का अपमान: उन्होंने कहा कि यह फैसला बैंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना और देश की आजादी के लिए ‘वंदे मातरम’ बोलते हुए फांसी पर चढ़ने वाले लाखों स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है।
कांग्रेस का पलटवार
- ऐतिहासिक संदर्भ: कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने जवाब देते हुए कहा कि CWC का यह निर्णय 1937 के उस प्रस्ताव पर आधारित है जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे दिग्गजों ने रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर स्वीकार किया था।
- ‘नकली राष्ट्रवाद’ का आरोप: कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए इसे मूल मुद्दों (जैसे बेरोजगारी और छात्र कल्याण) से ध्यान भटकाने वाला “नकली राष्ट्रवाद” बताया।
तमिलनाडु में क्यों मचा बवाल?
तमिलनाडु की धरती (महाबलीपुरम) पर अमित शाह के इस बड़े हमले और इसके समानांतर राज्य के क्षेत्रीय व राष्ट्रीय दलों के बीच तीखी बयानबाजी के चलते तमिलनाडु का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। दक्षिण के राज्यों और दिल्ली तक इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस-गठबंधन आमने-सामने आ गए हैं।
राजनीतिक और अन्य अपडेट्स के लिए आप Deccan Chronicle Online या Times of India की रिपोर्ट देख सकते हैं।













