
पटना:
बिहार में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने, आगामी शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE 4.0) के पैटर्न में बदलाव और राज्य की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली की उच्चस्तरीय जांच की मांगों को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। पटना के गर्दनीबाग में कई दिनों से अनशन और धरने पर बैठे छात्रों ने डाकबंगला चौराहे से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकाल कर अपनी आवाज बुलंद की है।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
- 70वीं BPSC परीक्षा रद्द हो: अभ्यर्थियों का आरोप है कि 70वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा में कई स्तरों पर अनियमितताएं हुई हैं। इसलिए परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से निष्पक्ष आयोजन किया जाए।
- TRE 4.0 में ‘सिंगल स्टेज’ परीक्षा: BPSC द्वारा शिक्षक भर्ती (TRE-4) के लिए दो चरणों (प्रारंभिक व मुख्य) के प्रस्तावित प्रारूप और नेगेटिव मार्किंग का छात्र विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि परीक्षा पूर्व की भांति एक ही चरण (Single Tier) में कराई जाए।
- नियमों में अचानक बदलाव पर रोक: दस्तावेज़ सत्यापन के बाद या प्रक्रिया के बीच में नियमों को बदलने का विरोध किया जा रहा है।
- पेपर लीक और सॉल्वर गिरोहों की स्वतंत्र जांच: बिहार में बार-बार होने वाले पेपर लीक के पीछे सक्रिय माफिया पर सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच आयोग के गठन की मांग की जा रही है।
- BSSC व अन्य विभागों का परीक्षा कैलेंडर: अभ्यर्थियों का कहना है कि BSSC (बिहार कर्मचारी चयन आयोग), लाइब्रेरियन और दरोगा भर्ती के लिए समयबद्ध वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाए।
पटना की सड़कों पर पुलिस और छात्रों के बीच टकराव
गांधी मैदान से शुरू हुए ‘मुख्यमंत्री आवास घेराव’ और ‘राजभवन मार्च’ के दौरान अभ्यर्थियों ने पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ दिया।
- वाटर कैनन और लाठीचार्ज: डाकबंगला चौराहा और जेपी गोलंबर के पास भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन (पानी की बौछार) और हल्के बल का प्रयोग करना पड़ा।
- कई छात्र हिरासत में: प्रदर्शन के दौरान पथराव और झड़प के बाद पुलिस ने दर्जनों प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों को हिरासत में ले लिया।
राजनीतिक मोड़ और सरकार की प्रतिक्रिया
- विपक्ष का हमला: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर अभ्यर्थियों के साथ तुरंत वार्ता करने और उनकी 15 सूत्री मांगों को स्वीकार करने का आग्रह किया है।
- प्रशांत किशोर व अन्य नेताओं का समर्थन: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और वामपंथी छात्र संगठनों (SFI/DYFI) ने भी गर्दनीबाग पहुंचकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है।
- सरकार का रुख: राज्य के शिक्षा मंत्री ने कहा है कि सरकार छात्रों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है और संवाद के दरवाजे खुले हैं। हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।













