
नालंदा विश्वविद्यालय के दीर्घकालीन विकास को लेकर राज्यपाल की उच्चस्तरीय बैठक, राजगीर को Knowledge & Innovation City बनाने पर जोर
पटना। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने सोमवार को बिहार लोक भवन में नालंदा विश्वविद्यालय के दीर्घकालीन विकास को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में नालंदा विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर ज्ञान, नवाचार और उत्कृष्ट शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक का मुख्य फोकस नालंदा विश्वविद्यालय की अकादमिक क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ उसे बिहार की व्यापक उच्च शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार की बौद्धिक एवं शैक्षणिक पहचान को और मजबूत करने पर रहा।
नालंदा को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने की दिशा में जोर
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि बिहार में प्रतिभा और बौद्धिक क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि राज्य की उपलब्धियों और नालंदा की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए।
उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक और सभ्यतागत महत्व को आधुनिक शिक्षा, शोध और नवाचार के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्यपाल ने नालंदा की ज्ञान परंपरा और इतिहास को व्यवस्थित तरीके से दस्तावेजीकृत करने की बात कही, ताकि शोध, लेखों और अन्य संचार माध्यमों के जरिए इसकी जानकारी देश-दुनिया तक पहुंचाई जा सके।
सड़क और रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर चर्चा
बैठक में नालंदा विश्वविद्यालय तक सड़क और रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। बेहतर परिवहन व्यवस्था को विश्वविद्यालय के विकास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहुंच बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
इसके साथ ही राजगीर के समग्र विकास को गति देने और इसे Knowledge and Innovation City के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। राजगीर को शिक्षा, शोध, नवाचार और पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
उच्चस्तरीय बैठक में कई प्रमुख अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में नालंदा विश्वविद्यालय के चांसलर अरविंद पनगढ़िया, बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन, विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन चतुर्वेदी, विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में विश्वविद्यालय की वर्तमान गतिविधियों, भविष्य की योजनाओं और बिहार के उच्च शिक्षा तंत्र के साथ बेहतर समन्वय को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
सरकारी तंत्र और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर
राज्यपाल ने सरकार और अकादमिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिक से अधिक सरकारी अधिकारी नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा करें और वहां चल रही पहलों को समझें।
इसके अलावा बिहार के अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शिक्षकों को नालंदा विश्वविद्यालय की कार्यशालाओं और अकादमिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की बात भी कही गई। इससे राज्य के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
Samarth Portal की भी हुई समीक्षा
बैठक के दौरान नालंदा विश्वविद्यालय में लागू Samarth Portal की स्थिति की भी समीक्षा की गई। राज्यपाल ने ऐसी डिजिटल व्यवस्थाओं पर जोर दिया जो सरल, सुगम और उपयोगकर्ताओं के लिए आसानी से समझ में आने वाली हों।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी प्रणालियों के माध्यम से आम लोगों, विद्यार्थियों और अन्य हितधारकों के लिए विश्वविद्यालय की सुविधाओं और संसाधनों तक पहुंच आसान होनी चाहिए।
राजगीर और बोधगया के पर्यटन विकास पर भी चर्चा
बैठक में बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों राजगीर और बोधगया के विकास को लेकर भी चर्चा हुई। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि दोनों पर्यटन स्थलों के विकास से संबंधित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जा चुके हैं।
राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय की मौजूदगी को देखते हुए शिक्षा, ज्ञान, नवाचार और पर्यटन को एक साथ विकसित करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे क्षेत्र में पर्यटन के साथ-साथ शिक्षा और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
नालंदा की पांडुलिपियों और विरासत के संरक्षण पर भी जोर
नालंदा की प्राचीन बौद्धिक और सभ्यतागत विरासत से जुड़ी पांडुलिपियों के संरक्षण और उनके प्रचार-प्रसार का मुद्दा भी बैठक में उठा। नालंदा की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक शोध और अकादमिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में काम करने की आवश्यकता बताई गई।
राज्यपाल ने नालंदा की विरासत को केवल ऐतिहासिक धरोहर के रूप में देखने के बजाय उसे आधुनिक शिक्षा, शोध और नवाचार के साथ जोड़ने की व्यापक दृष्टि पर जोर दिया।
बिहार की पहचान को वैश्विक मंच पर ले जाने की कोशिश
बैठक में सामने आया व्यापक दृष्टिकोण यह है कि आधुनिक बिहार को उसकी प्राचीन ज्ञान परंपरा से फिर से जोड़ा जाए। प्राचीन नालंदा दुनिया के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल रहा है और अब नालंदा विश्वविद्यालय को आधुनिक दौर में वैश्विक ज्ञान, शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शिक्षा, कनेक्टिविटी, पर्यटन, डिजिटल व्यवस्था, शोध, नवाचार और ऐतिहासिक विरासत—इन सभी पहलुओं को एक व्यापक विकास दृष्टिकोण से जोड़ने पर जोर दिया गया।
क्या है खबर का महत्व?
नालंदा विश्वविद्यालय के विकास को केवल एक विश्वविद्यालय के विस्तार के तौर पर नहीं, बल्कि बिहार की वैश्विक पहचान को मजबूत करने की व्यापक योजना के रूप में देखा जा रहा है। यदि सड़क और रेल कनेक्टिविटी, राजगीर का विकास, पर्यटन, उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो नालंदा-राजगीर क्षेत्र बिहार के महत्वपूर्ण Education, Knowledge, Innovation और Tourism Hub के रूप में उभर सकता है।













