
पटना: बिहार में बिजली व्यवस्था को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य में अब तक करीब 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में लगाए गए कुल प्रीपेड स्मार्ट मीटरों में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत बताई गई है।
प्रीपेड स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत और उपलब्ध बैलेंस पर नजर रखने की सुविधा मिलती है। पारंपरिक मीटर की तुलना में स्मार्ट मीटर व्यवस्था को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किया जा रहा है।
बिजली बिलिंग में पारदर्शिता पर जोर
स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू होने से बिजली की खपत के आधार पर बिलिंग को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। उपभोक्ता अपने मीटर में उपलब्ध बैलेंस और बिजली खपत की जानकारी डिजिटल माध्यम से देख सकते हैं। इससे बिलिंग से जुड़ी शिकायतों को कम करने और बिजली वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने की उम्मीद है।
राजस्व संग्रह में भी सुधार
बिजली कंपनियों के लिए प्रीपेड मीटर व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण फायदा राजस्व संग्रह को लेकर माना जा रहा है। प्रीपेड सिस्टम में उपभोक्ता पहले रिचार्ज करता है और उसके बाद बिजली का इस्तेमाल करता है। इससे बकाया बिजली बिल की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
बिहार में बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने को राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली आपूर्ति, खपत और भुगतान व्यवस्था को और अधिक तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया जा सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
प्रीपेड स्मार्ट मीटर के इस्तेमाल से उपभोक्ताओं को बिजली की खपत पर अधिक नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। रिचार्ज और खपत की जानकारी उपलब्ध रहने से उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार बिजली इस्तेमाल करने की योजना बना सकते हैं।
हालांकि, स्मार्ट मीटर को लेकर कुछ उपभोक्ताओं की ओर से बिलिंग और रिचार्ज से संबंधित सवाल भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में बिजली कंपनियों के लिए उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली और शिकायत समाधान प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देना महत्वपूर्ण होगा।
बिहार में करीब 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाने के साथ राज्य देश में स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। यह कदम आने वाले वर्षों में बिहार की बिजली वितरण व्यवस्था को और अधिक डिजिटल और तकनीक आधारित बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।













