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रुपया 95.46 प्रति डॉलर के करीब, ग्लोबल तनाव का भारतीय बाजार पर असर

मुंबई:

वैश्विक तनाव (Geopolitical Tensions) और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय वित्तीय बाजार पर चौतरफा दबाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर होते हुए 95.46 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली ने घरेलू बाजार के मूड को बिगाड़ दिया है।

गिरावट की 3 मुख्य वजहें:

  1. कच्चे तेल में उबाल: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल $96-$100 प्रति बैरल के पास पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
  2. विदेशी पूंजी की निकासी: अनिश्चितता के माहौल में विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकाल कर डॉलर और सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
  3. शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार तीन दिनों से बिकवाली हावी है। आईटी (IT), ऑटो और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली से निवेशकों को लाखों करोड़ का नुकसान हुआ है।

RBI की नजर और आगे का आउटलुक

रुपये को बहुत अधिक गिरने से रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की बिक्री कर बाजार में हस्तक्षेप करने की खबरें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक मोर्चे पर तनाव कम नहीं हुआ और कच्चे तेल की दरें ऊंची बनी रहीं, तो रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है।

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