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2.5 करोड़ की ठगी: बिहार में छिपे थे साइबर गिरोह के दो सरगना, ट्रैकिंग पर लोकेशन बता रही थी ‘फ्रांस’

पटना:

बिहार पुलिस की साइबर क्राइम टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 2.50 करोड़ रुपये ठगने वाले हाईटेक गैंग के दो मुख्य सरगनाओं का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस जब भी आरोपियों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस और ट्रैकिंग पर डालती थी, तो स्क्रीन पर लोकेशन भारत के बजाय ‘फ्रांस’ दिखाई देती थी।

बिहार से ही संचालित हो रहा था फर्जीवाड़ा

तकनीकी जांच और आधुनिक सर्विलांस तकनीक के इस्तेमाल से खुलासा हुआ कि दोनों मास्टरमाइंड कहीं विदेश में नहीं, बल्कि बिहार के भीतर ही छिपे हुए थे। वे पुलिस को गुमराह करने और अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन (VPN) और उन्नत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके अपनी आईपी एड्रेस और फर्जी लोकेशन फ्रांस सेट कर रखी थी।

मुख्य आरोपी शेखपुरा के निवासी

साइबर पुलिस के अनुसार, इस पूरे हाईटेक नेटवर्क के मास्टरमाइंड शेखपुरा जिले के रहने वाले दीपक कुमार और वरुण कुमार हैं। फिलहाल दोनों आरोपी फरार हैं और पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

तीन सहयोगी गिरफ्तार, ऐसे करते थे ठगी

पटना पुलिस ने अगमकुआं और अनिसाबाद इलाकों में छापेमारी कर गैंग के तीन स्थानीय सदस्यों—गौरव कुमार, आदर्श कुमार और अमन राज को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गैंग चालू या बंद पड़ी शेल (फर्जी) कंपनियों के बैंक खातों को खरीदता था। साइबर अपराध के जरिए ठगी गई रकम को इन्हीं कंपनियों के खातों के जरिए अलग-अलग जगह ट्रांसफर कर मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी।

इसके अलावा, इसी गैंग ने हाल ही में पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति का बैंक खाता हैक कर कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए 18.99 लाख रुपये भी उड़ा लिए थे।

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