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AI के बढ़ते दौर में साइबर सुरक्षा पर जोर, डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित बनाने की जरूरत

पटना:

जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और डिजिटल सेवाएं जीवन का अहम हिस्सा बन रही हैं, वैसे-वैसे साइबर अपराध के नए और जटिल खतरे सामने आ रहे हैं। एआई (AI) के इस दौर में डीपफेक, वॉयस क्लोनिंग और ऑटोमेटेड डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। इस स्थिति से निपटने के लिए बिहार में प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर साइबर सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

डिजिटल तंत्र को क्यों है मजबूत सुरक्षा की जरूरत?

आधुनिक दौर में वित्तीय लेन-देन से लेकर सरकारी डेटाबेस तक सब कुछ ऑनलाइन हो चुका है। एआई तकनीकों का दुरुपयोग कर ठग और हैकर्स लोगों की निजी जानकारी, बैंक खाते और सोशल मीडिया पहचान पर सेंध लगा रहे हैं।

  • एआई-आधारित ठगी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेकर अपराधियों द्वारा फर्जी आवाज निकालने (Voice Cloning) और फर्जी वीडियो (Deepfake) बनाकर ठगी करने के मामले बढ़े हैं।
  • डेटा सुरक्षा की चुनौती: पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक के डिजिटल सिस्टम और सरकारी पोर्टलों को डेटा रीच व हैकिंग से बचाना अनिवार्य हो गया है।

बिहार पुलिस और SBI का ‘साइबर सिक्योर बिहार’ अभियान

साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और आम लोगों को जागरूक करने के लिए बिहार पुलिस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और तकनीक विशेषज्ञों ने मिलकर राज्यस्तरीय ‘साइबर सिक्योर बिहार’ (Cyber Secure Bihar) अभियान की शुरुआत की है।

  • हेल्पलाइन 1930 का विस्तार: राज्य में 1930 साइबर हेल्पलाइन की क्षमता को बढ़ाकर 75 लाइनों तक किया जा रहा है।
  • साइबर प्रहार और रिकवरी: पुलिस आंकड़ों के अनुसार, साइबर पोर्टल के जरिए ठगी की गई करोड़ों रुपये की राशि को फ्रीज कराने और पीड़ितों तक वापस पहुंचाने में सफलता मिली है।
  • विशेष इकाइयां: राज्य के सभी पुलिस रेंजों और सीमावर्ती क्षेत्रों में ईओयू (EOU) की साइबर इंटेलिजेंस यूनिट तैनात की गई हैं।

साइबर अपराधियों पर सख्त कानून (CCA) का दायरा

राज्य सरकार ने डिजिटल अपराध और साइबर फ्रॉड पर नकेल कसने के लिए बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) में संशोधन कर साइबर अपराधियों और फर्जी सोशल मीडिया एकाउंट्स से भ्रम फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई के प्रावधान तय किए हैं। इसके साथ ही संदिग्ध मोबाइल नंबरों और आईएमईआई (IMEI) नंबरों को ब्लॉक करने के लिए ‘साइबर प्रहार’ जैसे विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

“एआई के दौर में साइबर सुरक्षा केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक साझा प्रयास है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, बैंक क्रेडेंशियल या ओटीपी (OTP) किसी के साथ साझा न करें और किसी भी फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।”

विशेषज्ञों की सलाह:

“एआई के दौर में साइबर सुरक्षा केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक साझा प्रयास है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, बैंक क्रेडेंशियल या ओटीपी (OTP) किसी के साथ साझा न करें और किसी भी फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।”

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