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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कारोबार की रफ्तार थमी, स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों पर असर

पटना: बिहार के कई जिलों में बाढ़ का तांडव जारी है। नदियों के उफान और जलभराव के कारण न सिर्फ आम जीवन अस्त-व्यस्त हुआ है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और व्यापार पर भी इसका गहरा और बुरा असर पड़ा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बाजार ठप पड़ गए हैं और रोजमर्रा के कारोबारियों की कमाई पूरी तरह थम गई है।

बाजारों में सन्नाटा और सप्लाई चेन प्रभावित तटवर्ती और निचले इलाकों के मुख्य बाजारों में पानी भर जाने के कारण दुकानें बंद हैं। सड़कें और रास्ते जलमग्न होने से माल की आवाजाही (सप्लाई चेन) पूरी तरह बाधित हो गई है।

  • स्टॉक की बर्बादी: दुकानों और गोदामों में पानी घुसने से किराना, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और फुटवियर व्यापारियों का लाखों का सामान खराब हो चुका है।
  • छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों पर संकट: रोजाना कमाकर खाने वाले सब्जी विक्रेता, चाय-नाश्ते की दुकानें और ठेले वालों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

त्योहारी सीजन से पहले भारी आर्थिक नुकसान व्यापारियों का कहना है कि बाढ़ के कारण ग्राहकों का आना पूरी तरह बंद हो गया है। आने वाले त्योहारी सीजन के लिए जो सामान मंगाया गया था, वह भी जलजमाव की वजह से फंस गया है या खराब हो रहा है।

व्यापारी संगठनों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को आर्थिक सहायता और कर राहत देने पर विचार किया जाए, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें।

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