--विज्ञापन यहां--

मधेपुरा में Alstom की नजर 200 और इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव ऑर्डर पर, बिहार में बढ़ सकती है मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार की रफ्तार

मधेपुरा / पटना

फ्रांसीसी रेलवे दिग्गज Alstom और भारतीय रेलवे के संयुक्त उपक्रम Madhepura Electric Locomotive Private Limited (MELPL) के जरिए बिहार का सीमांचल क्षेत्र देश के औद्योगिक मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। Alstom अब भारतीय रेलवे से 200 अतिरिक्त हाई-पावर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (रेल इंजन) के नए फॉलो-ऑन ऑर्डर हासिल करने की तैयारी में है।

कंपनी अपने मौजूदा 800 लोकोमोटिव (12,000 HP – WAG 12B) के विशालकाय कॉन्ट्रैक्ट की आपूर्ति तेजी से पूरी कर रही है। यदि 200 नए इंजनों का अतिरिक्त ऑर्डर स्वीकृत होता है, तो इससे बिहार में मैन्युफैक्चरिंग, स्थानीय सप्लाई चेन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

हालिया सोशियो-इकोनॉमिक रिपोर्ट: बिहार की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान

हाल ही में जारी डैन एंड ब्रैडस्ट्रीट (Dun & Bradstreet) की सामाजिक-आर्थिक प्रभाव रिपोर्ट (Socio-Economic Impact Assessment) में मधेपुरा प्लांट के असर के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:

  • राज्य के राजस्व में हिस्सेदारी: मधेपुरा लोकोमोटिव प्लांट का योगदान वित्तीय वर्ष 2024 में बिहार के कुल GST कलेक्शन का लगभग 1% रहा।
  • जिला जीडीपी (GDDP): मधेपुरा जिले के कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDDP) में इस प्लांट की हिस्सेदारी 4.6% दर्ज की गई है।
  • राष्ट्रीय आर्थिक आउटपुट: FY2020 से FY2026 के बीच इस संयुक्त उद्यम ने देश की अर्थव्यवस्था में करीब ₹60,000 करोड़ का कुल आर्थिक आउटपुट और ₹23,800 करोड़ का ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) जोड़ा है।

नए ऑर्डर से बिहार को क्या होंगे फायदे?

औद्योगिक रफ्तार और मेक इन इंडिया (Make in India):मधेपुरा प्लांट में बनने वाला WAG-12B (12,000 हॉर्सपावर) इंजन भारत में निर्मित सबसे शक्तिशाली रेल इंजन है। नए 200 इंजनों का ऑर्डर मिलने से प्लांट की सालाना 120 लोकोमोटिव बनाने की क्षमता का शत-प्रतिशत इस्तेमाल जारी रहेगा।

स्थानीय स्तर पर रोजगार और कौशल विकास:मधेपुरा जिले के पंजीकृत विनिर्माण (Factory) रोजगार में अकेले इस प्लांट की हिस्सेदारी 12% है। नए ऑर्डर से प्रत्यक्ष नौकरियों के साथ-साथ वेंडर्स, लॉजिस्टिक्स और मेंटेनेंस सेक्टर में हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार (Indirect Jobs) पैदा होंगे।

90% तक स्वदेशीकरण (Localisation):वर्तमान में इन इंजनों में लगने वाले लगभग 90% कलपुर्जे स्वदेशी (भारतीय आपूर्ति कर्ताओं द्वारा) तैयार किए जा रहे हैं। नए ऑर्डर से बिहार और आसपास के क्षेत्रों में छोटे व एमएसएमई (MSME) वेंडर इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

माल ढुलाई (Freight) में क्रांति:ये शक्तिशाली लोकोमोटिव देश के समर्पित माल गलियारे (Dedicated Freight Corridors) पर 6,000 टन वजन वाले मालगाड़ियों को 120 किमी/घंटा की रफ्तार से खींचने में सक्षम हैं, जिससे माल ढुलाई का लागत समय काफी घटेगा।

व्हाट्सएप से जुड़ें

अभी जुड़ें

टेलीग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

इंस्टाग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें