--विज्ञापन यहां--

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और AI-generated content के बीच बढ़ी fact-checking की जरूरत, यूजर्स को सतर्क रहने की सलाह

पटना / विशेष रिपोर्ट

डिजिटल युग में जहां सूचनाएं पलक झपकते ही लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं, वहीं सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बने फेक फोटो, डीपफेक (Deepfake) वीडियो और भ्रामक ऑडियो की बाढ़ आ गई है। हाल के समय में राजनीतिक नेताओं के फर्जी बयानों से लेकर मशहूर हस्तियों के मॉर्फ्ड वीडियो और आर्थिक धोखाधड़ी से जुड़ी फर्जी खबरें धड़ल्ले से वायरल हो रही हैं। ऐसे माहौल में आम इंटरनेट यूजर्स के लिए फर्जी और असली कंटेंट के बीच फर्क पहचानना बेहद जरूरी हो गया है।

AI-जनरेटेड और फेक कंटेंट का क्यों बढ़ रहा है दायरा?

आसान AI टूल्स की उपलब्धता: अब बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञता के कोई भी व्यक्ति AI इमेज जनरेटर या वाइस-क्लोनिंग ऐप्स की मदद से हूबहू नकली तस्वीरें या आवाज बना सकता है।

सेंसेशनलिज्म और व्यूज का खेल: सोशल मीडिया पर अधिक से अधिक लाइक्स, शेयर्स और व्यूज हासिल करने के लिए कई पेज व अकाउंट्स बिना जांचे-परखे सनसनीखेज खबरें परोसते हैं।

सख्त कानून और नया IT नियम: सरकार ने बढ़ते खतरे को देखते हुए IT Rules, 2021 में संशोधन कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को संवेदनशील/फर्जी कंटेंट हटाने के लिए कड़े समयसीमा (महज 2 से 3 घंटे) के निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद यूजर के स्तर पर जागरूकता बेहद अहम है।

    नकली/AI कंटेंट की पहचान कैसे करें? (Fact-Checking Tips)

    • बारीकियों पर ध्यान दें: AI से बनी तस्वीरों में अक्सर इंसानी उंगलियां अजीब दिखती हैं, चेहरे की स्किन जरूरत से ज्यादा चिकनी (Blurry/Smooth) लगती है, या बैकग्राउंड का लिखावट धुंधला होता है।
    • लिप-सिंक (Lip-Sync) और आई-ब्लिंकिंग जांचें: डीपफेक वीडियो में बोलने वाले व्यक्ति के होंठ और आवाज के बीच थोड़ा गैप हो सकता है, या उनकी पलकें अस्वाभाविक तरीके से झपकती हैं।
    • गूगल रिवर्स इमेज सर्च (Reverse Image Search): अगर कोई तस्वीर संदिग्ध लगे, तो उसे Google Lens या TinEye पर अपलोड करके सर्च करें। इससे पता चल जाएगा कि फोटो असली है या किसी पुरानी घटना का।
    • सोर्स और हेडलाइन की जांच करें: क्या यह खबर किसी आधिकारिक न्यूज वेबसाइट या सरकारी PIB/पुलिस हैंडल पर मौजूद है? केवल व्हॉट्सएप मैसेज या रील्स पर भरोसा न करें।

    यूजर्स के लिए जरूरी गाइडलाइंस (क्या करें और क्या न करें)

    • बिना पुष्टि शेयर न करें: किसी भी भड़काऊ, भावनात्मक या अचानक हैरान करने वाले वीडियो/मैसेज को बिना फैक्ट-चेक किए आगे फॉरवर्ड या शेयर करने से बचें।
    • फैक्ट-चेकिंग हेल्पडेस्क की मदद लें: यदि कोई सरकारी योजना, नीति या खबर संदिग्ध लगे, तो PIB Fact Check (WhatsApp: +91 8799711259) या स्वतंत्र फैक्ट-चेकिंग पोर्टल्स की मदद से जांच कराएं।
    • साइबर फ्रॉड से बचें: AI वॉइस क्लोनिंग के जरिए रिश्तेदारों की आवाज बनाकर पैसे मांगने जैसे साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। ऐसा कोई भी कॉल आने पर तुरंत फोन काटकर अपने रिश्तेदार को सामान्य कॉल करके पुष्टि करें।

    व्हाट्सएप से जुड़ें

    अभी जुड़ें

    टेलीग्राम से जुड़ें

    अभी जुड़ें

    इंस्टाग्राम से जुड़ें

    अभी जुड़ें

    यह भी पढ़ें

    सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट के साथ बढ़ा फर्जी विज्ञापनों का खतरा, यूजर्स को सतर्क रहने की जरूरत

    ‘Mirzapur: The Movie’ पर सोशल मीडिया में छिड़ी चर्चा, फैंस ने कालीन भैया और मुन्ना की वापसी पर दी प्रतिक्रिया

    सोशल मीडिया पर सरकारी अधिकारी बनकर भेजे जा रहे फर्जी मैसेज, I4C ने यूजर्स को किया अलर्ट

    इंटरनेट पर वायरल कंटेंट के बीच बढ़ी डिजिटल सावधानी की जरूरत, फर्जी लिंक और ऐप से रहें सतर्क

    सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापनों का नया जाल, आकर्षक कंटेंट के जरिए यूजर्स को Malware डाउनलोड कराने की कोशिश

    बिहार में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के वीडियो सोशल मीडिया पर दिनभर ट्रेंड करते रहे।