
पटना
बिहार सरकार ने राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की मॉनसून पर निर्भरता कम करने के लिए ग्रामीण विकास को सिंचाई सुविधाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में ‘मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना’ के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 11,000 नए निजी नलकूप (Borewells) लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके लिए सरकार ने ₹305.60 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।
सिंचाई क्षमता का विस्तार और 2.30 लाख हेक्टेयर को लाभ
सरकार के इस कदम से राज्य के हजारों किसानों को अपने खेतों में ही सिंचाई का स्थायी साधन उपलब्ध होगा:
- 2.30 लाख हेक्टेयर में सिंचाई: पूर्व में अधिसूचित 35,000 नलकूपों और इन नए 11,000 बोरिंगों को मिलाकर कुल 46,000 नलकूपों से राज्य के करीब 2.30 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सीधा पानी मिलेगा।
- लघु व सीमांत किसानों को प्राथमिकता: इस योजना के तहत राज्य के सामान्य, पिछड़े, अति पिछड़े और अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को नलकूप व मोटर पंप लगाने पर 50% से लेकर 80% तक का अनुदान (सब्सिडी) दिया जा रहा है।
- सीधा बैंक ट्रांसफर (DBT): योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से सीधे किसानों के बैंक खातों (DBT) के माध्यम से दिया जाएगा।
नेहरों का कायाकल्प: कटिहार और नरपतगंज के लिए ₹66 करोड़ जारी
निजी नलकूपों के अलावा सरकार ने राज्य के नहरी तंत्र (Canal System) को मजबूत करने के लिए भी दो बड़े फैसले लिए हैं:
कटिहार सिंचाई प्रमंडल: कटिहार वितरणी, फूलपुर, हसनगंज, बैजनाथपुर और सेमापुर उप-वितरणियों के पुनरुद्धार के लिए ₹35.82 करोड़ स्वीकृत किए गए।
नरपतगंज (अररिया): जानकीनगर शाखा नहर और उससे जुड़ी उप-नहरों के जीर्णोद्धार के लिए ₹30.35 करोड़ की मंजूरी दी गई है।
पैक्स और गोदाम निर्माण से ग्रामीण विकास को मजबूती
सिंचाई के साथ-साथ फसलों के सुरक्षित भंडारण के लिए सहकारिता क्षेत्र में 48,200 मीट्रिक टन नई भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी। इसके तहत पंचायत स्तर पर 52 प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को ₹34.95 करोड़ का बजट आबंटित किया गया है, जिससे किसानों को अपनी उपज कम दामों पर बेचने को मजबूर न होना पड़े।
अधिक जानकारी और ऑनलाइन आवेदन के लिए बिहार सरकार के आधिकारिक लघु जल संसाधन पोर्टल या ईटीवी भारत की विस्तृत रिपोर्ट पर विजिट कर सकते हैं।












