
मौसम में बदलाव और नमी (ह्यूमिडिटी) के बढ़ते स्तर को देखते हुए राजधानी पटना समेत बिहार के प्रमुख शहरों में स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता और खानपान की आदतों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
- हल्का और सुपाच्य भोजन: मानसूनी नमी के दौरान पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। आहार विशेषज्ञों (Dietitians) का कहना है कि इस मौसम में भारी, तला-भुना और बासी खाना खाने से पेट संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं।
- हाइड्रेशन और संतुलित पोषण: शरीर में जल संतुलन बनाए रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने के लिए सुपाच्य पोषक तत्वों को दैनिक आहार में शामिल करने की सलाह दी गई है।
देसी सुपरफूड्स की बढ़ती मांग
- भुना हुआ मखाना: मखाना उच्च फाइबर, कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण एक बेहतरीन ‘सुपरफूड’ के रूप में उभरा है। पटना के बाजारों और घरों में शाम के स्नैक्स के रूप में हल्के भुने मखाने की खपत काफी बढ़ी है।
- सत्तू पेेय (Sattu Drink): सत्तू को प्रोटीन का पावरहाउस माना जाता है। मानसून में पेट को ठंडा रखने और तुरंत ऊर्जा देने के लिए लोग सत्तू के नमकीन व मीठे शरबत को तवज्जो दे रहे हैं।
- स्थानीय व जैविक अनाज: बाजार में रागी (मड़ुआ), बाजरा, कतरनी चावल और जैविक दालों जैसे पारंपरिक अनाजों के प्रति शहरी आबादी का रुझान बढ़ा है।
स्थानीय से वैश्विक बाजार तक पहचान
- बिहार के इन पारंपरिक कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों (सत्तू, मखाना, मिलेट कुकीज) की मांग न केवल स्थानीय बाजारों में बढ़ी है, बल्कि एमएसएमई (MSME) निर्यात पहलों के जरिए इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर (जैसे वियतनाम) पर भी सराहा जा रहा है।













