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AI की बढ़ती मांग से इलेक्ट्रॉनिक्स पर असर, मेमोरी चिप की कमी से बढ़ सकती हैं डिवाइस की कीमतें

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल का असर अब आम इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। दुनिया भर में AI डेटा सेंटरों के विस्तार के कारण DRAM और NAND जैसी मेमोरी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे इनकी आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। इसका असर स्मार्टफोन, लैपटॉप, पीसी, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की लागत पर पड़ सकता है।

AI सर्वर में इस्तेमाल होने वाली High-Bandwidth Memory (HBM) की मांग में तेज उछाल आया है। मेमोरी निर्माता अपनी उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा HBM और अन्य AI-केंद्रित मेमोरी उत्पादों की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं। इससे पारंपरिक DRAM की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर कंप्यूटर, स्मार्टफोन और अन्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है।

मार्केट रिसर्च फर्म TrendForce के अनुसार, 2026 की तीसरी तिमाही में पारंपरिक DRAM की कॉन्ट्रैक्ट कीमतों में 13 से 18 प्रतिशत तिमाही वृद्धि का अनुमान है। वहीं NAND Flash की कीमतों में भी 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया था। हालांकि उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर दबाव बढ़ने के कारण कीमतों में वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है।

मेमोरी की बढ़ती लागत का असर डिवाइस निर्माताओं पर भी पड़ रहा है। कंपनियों के सामने दो विकल्प हैं—या तो बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन करें या फिर इसका भार ग्राहकों पर डालें। बाजार में पहले से ही स्मार्टफोन, पीसी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर इसका असर दिखाई देने लगा है।

भारत में भी इसका असर महत्वपूर्ण हो सकता है। देश में स्मार्टफोन और पीसी बाजार तेजी से बढ़ रहा है और AI-सक्षम डिवाइस की मांग भी बढ़ रही है। IDC के मुताबिक, भारत में 2026 की दूसरी तिमाही में PC बाजार में सालाना आधार पर 12.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि AI-capable PCs की बिक्री में 109.9 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में यदि मेमोरी और दूसरे कंपोनेंट महंगे बने रहते हैं तो नए डिवाइस की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या तुरंत खत्म होने वाली नहीं है। AI डेटा सेंटरों के लिए मेमोरी की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि नई उत्पादन क्षमता तैयार करने में कई साल लगते हैं। TechInsights के अनुसार, AI के कारण पैदा हुआ मौजूदा मेमोरी सप्लाई संकट लंबे समय तक DRAM और NAND की कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम को बाजार में ‘Chipflation’ के नाम से भी देखा जा रहा है—यानी चिप और सेमीकंडक्टर की बढ़ती कीमतों का असर तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर पड़ना। आने वाले महीनों में AI की मांग, मेमोरी उत्पादन क्षमता और कंपनियों की कीमत तय करने की रणनीति यह तय करेगी कि स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य डिवाइस कितने महंगे होते हैं।

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