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AI के दौर में डिजिटल फ्रॉड का बढ़ता खतरा, फर्जी ऐप और विज्ञापनों के जरिए बैंकिंग डेटा चोरी की कोशिशें तेज

नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026: डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधियों ने ठगी के तरीके भी और ज्यादा हाईटेक कर लिए हैं। अब फर्जी लिंक और कॉल के साथ-साथ सोशल मीडिया विज्ञापनों, नकली मोबाइल ऐप और AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों के बैंकिंग डेटा और मोबाइल डिवाइस तक पहुंच बनाने की कोशिशें बढ़ रही हैं। हाल ही में केंद्र सरकार के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने ऐसे दुर्भावनापूर्ण Android ऐप्स को लेकर अलर्ट जारी किया है, जिन्हें सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा रहा था।

सोशल मीडिया विज्ञापन बन रहे साइबर ठगी का नया हथियार

I4C की National Cybercrime Threat Analytics Unit (NCTAU) ने चेतावनी दी है कि कुछ साइबर अपराधी Facebook और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर भ्रामक विज्ञापन चलाकर यूजर्स को संदिग्ध Android ऐप डाउनलोड करने के लिए आकर्षित कर रहे हैं। हालिया मामलों में कुछ ऐप्स को अश्लील कंटेंट से जुड़े ऐप के रूप में पेश किया गया, जबकि उनका वास्तविक उद्देश्य डिवाइस में मैलवेयर पहुंचाना और वित्तीय जानकारी चोरी करना था।

इन ऐप्स को डाउनलोड करने के बाद यूजर से Accessibility जैसी संवेदनशील permissions मांगी जा सकती हैं। अनुमति मिलने पर साइबर अपराधियों को डिवाइस पर अनधिकृत नियंत्रण हासिल करने, बैंकिंग क्रेडेंशियल्स चुराने और वित्तीय लेनदेन में हस्तक्षेप करने का मौका मिल सकता है।

फर्जी बैंकिंग ऐप बनाकर भी हो रही ठगी

AI और आसानी से उपलब्ध डेवलपमेंट टूल्स ने साइबर अपराधियों के लिए नकली ऐप तैयार करना भी आसान कर दिया है। जुलाई 2026 में सामने आए एक मामले में एक आरोपी पर AI और Telegram की मदद से नकली बैंकिंग ऐप और malware APK तैयार करने का आरोप लगा था। एक पीड़ित को WhatsApp के जरिए ऐसा APK भेजा गया था, जो वास्तविक बैंकिंग ऐप जैसा दिखाई देता था।

ऐसे मामलों में साइबर अपराधी ऐप के नाम, लोगो और इंटरफेस को वास्तविक बैंकिंग ऐप जैसा बनाने की कोशिश करते हैं। यूजर के ऐप में लॉगिन करने या संवेदनशील अनुमति देने के बाद उसकी जानकारी अपराधियों तक पहुंच सकती है।

सरकार ने हजारों संदिग्ध ऐप किए ब्लॉक

केंद्र सरकार के अनुसार, 30 जून 2026 तक I4C ने 3,718 मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक किया था, जिनमें fraudulent loan apps भी शामिल हैं। वहीं Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System (CFCFRMS) के जरिए 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में ₹11,158 करोड़ से ज्यादा की वित्तीय राशि बचाई गई।

सरकार ने साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे संदिग्ध खातों और डिजिटल पहचानकर्ताओं की निगरानी के लिए Suspect Registry भी शुरू की है। 30 जून 2026 तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिले 30.48 लाख से अधिक suspect identifiers और 32.08 लाख Layer-1 mule accounts की जानकारी साझा की गई थी।

AI से मुकाबला भी, AI का दुरुपयोग भी

दिलचस्प बात यह है कि AI जहां साइबर अपराधियों के लिए नए खतरे पैदा कर रहा है, वहीं सुरक्षा एजेंसियां भी इसी तकनीक का इस्तेमाल फ्रॉड रोकने के लिए कर रही हैं। मई 2026 में I4C और Reserve Bank Innovation Hub (RBIH) के बीच हुए समझौते का उद्देश्य AI आधारित fraud detection को मजबूत करना है। इसके तहत संदिग्ध और mule accounts की पहचान के लिए AI आधारित सिस्टम को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है।

ऐसे बचें फर्जी ऐप और विज्ञापनों से

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी ऐप को अनजान वेबसाइट, WhatsApp लिंक, Telegram चैनल या सोशल मीडिया विज्ञापन से डाउनलोड न करें। बैंकिंग ऐप हमेशा आधिकारिक app store या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से ही डाउनलोड करें। किसी ऐप को अनावश्यक Accessibility, SMS, Contacts या Screen Control जैसी permissions देने से बचें।

अगर बैंक खाते से अनधिकृत लेनदेन हो जाए तो तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर रिपोर्ट दर्ज करें।

आज के डिजिटल दौर में सबसे जरूरी सुरक्षा यही है कि किसी विज्ञापन, ऐप या लिंक पर भरोसा करने से पहले उसके स्रोत की जांच करें। आकर्षक ऑफर, डर पैदा करने वाले संदेश और AI से तैयार किए गए बेहद वास्तविक दिखने वाले कंटेंट को देखकर तुरंत कार्रवाई करने के बजाय पहले सत्यापन करना ही डिजिटल फ्रॉड से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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