
पटना:
बिहार में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल जालसाजी पर नकेल कसने के लिए बिहार पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजधानी पटना में बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) और चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (CNLU) के बीच तीन साल के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।


इस रणनीतिक समझौते का मुख्य उद्देश्य साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन, डिजिटल फॉरेंसिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नो-लीगल रिसर्च के क्षेत्र में पुलिस बल की क्षमता को आधुनिक बनाना है।
नया कानून और डिजिटल सबूत
MoU के दौरान साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के पुलिस महानिरीक्षक (IG) रंजीत कुमार मिश्रा और CNLU के कुलपति प्रो. (डॉ.) फैजान मुस्तफा प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इस अवसर पर बताया गया कि नए आपराधिक कानूनों—भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—के तहत डिजिटल साक्ष्यों को अदालत में पुख्ता साबित करने के लिए विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी। इससे अपराध स्थल से लेकर अदालत में केस के निष्पादन तक डिजिटल सबूतों की वैधता बनी रहेगी।
पुलिस कर्मियों को फीस में 20% की छूट
इस समझौते का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि CNLU अपने साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक से जुड़े शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले पात्र बिहार पुलिस कर्मियों को शिक्षण शुल्क में 20 प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान करेगा। इसके अलावा दोनों संस्थान मिलकर मॉक ट्रायल, संयुक्त रिसर्च और वर्कशॉप का आयोजन करेंगे, ताकि पुलिस बल को आधुनिक फॉरेंसिक जांच में निपुण बनाया जा सके।

डिजिटल फॉरेंसिक और कानून की पढ़ाई को एक मंच पर लाते हुए बिहार पुलिस (CCSU) और CNLU पटना के बीच 3 साल का एग्रीमेंट हुआ है। साइबर अपराधियों पर कानूनी शिकंजा मजबूत करने के लिए तैयार की गई इस योजना की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- 3 साल की रणनीतिक साझेदारी: बिहार पुलिस की साइबर सेल (CCSU) और चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) मिलकर साइबर क्राइम और AI से जुड़ी चुनौतियों से निपटेंगे।
- अदालत में टिकेंगे डिजिटल सबूत: नए कानून BNSS और BSA के मानकों के अनुसार डिजिटल साक्ष्यों की जब्ती, फॉरेंसिक जांच और अदालती प्रस्तुति के लिए साझी SOP बनाई जाएगी।
- पुलिस बल को शैक्षणिक छूट: CNLU के साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक कोर्स में एडमिशन लेने वाले बिहार पुलिस कर्मियों को ट्यूशन फीस पर 20% छूट मिलेगी।
- मॉक ट्रायल और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग: पुलिस अधिकारियों को फॉरेंसिक जांच में दक्ष बनाने के लिए मॉक ट्रायल, सेमिनार और जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट चलाए जाएंगे।
- अनुसंधान में सुधार: IG रंजीत कुमार मिश्रा और VC प्रो. फैजान मुस्तफा के अनुसार, इस तालमेल से मुकदमों की विवेचना की गुणवत्ता बढ़ेगी और अपराधियों को सजा दिलाना आसान होगा।












