
पटना:
मानसून के दस्तक देने के साथ ही लोगों को भीषण गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन बारिश का मौसम अपने साथ कई तरह के मौसमी संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में हवा और पानी के माध्यम से बैक्टीरिया व वायरस तेजी से पनपते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, डायरिया, आई फ्लू (कंजक्टिवाइटिस) और त्वचा के संक्रमण का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
जलभराव वाले इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
विशेष रूप से जलभराव वाले इलाकों में मच्छरों और हानिकारक जीवाणुओं का प्रकोप अधिक होता है। स्थिर पानी में डेंगू और मलेरिया के मच्छर पनपते हैं। इसके अलावा, गंदे पानी के संपर्क में आने से लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारियाँ और पैरों में फंगल इंफेक्शन की समस्या हो सकती है।
संक्रमण से बचाव के 6 मुख्य उपाय:
- घर के आसपास पानी न जमा होने दें: गमलों, कूलरों, पुराने टायरों और गड्ढों में पानी न एकत्र होने दें। हफ़्ते में कम से कम एक बार इन सभी की सफाई करें।
- साफ व उबला पानी ही पीएं: मानसून के दौरान दूषित पानी से होने वाले रोगों (टाइफाइड, हैजा) से बचने के लिए पानी को उबालकर या फिर वॉटर प्यूरीफायर का पानी ही इस्तेमाल करें।
- ताजा व गर्म भोजन अपनाएं: बाहर के खुले, बासी और कटे हुए फल या स्ट्रीट फूड खाने से बचें। घर पर बना ताजा भोजन ही खाएं।
- व्यक्तिगत स्वच्छता का रखें ध्यान: बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। बारिश में भीगने पर तुरंत साफ पानी से नहाकर खुद को सुखाएं।
- मच्छरों से बचाव: पूरे बाजू के कपड़े पहनें, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और शरीर पर मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम लगाएं।
- त्वचा को सूखा रखें: गीले कपड़े या गीले जूते लंबे समय तक न पहनें। इससे फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी जलभराव वाले निचले इलाकों में समय-समय पर एंटी-लार्वा स्प्रे और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव के निर्देश दिए हैं। किसी भी प्रकार का बुखार, पेट खराब या संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी डॉक्टर से परामर्श लें और खुद से दवा लेने (सेल्फ-मेडिकेशन) से बचें।













