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छोटे शहरों में टेक हायरिंग बढ़ने से बिहार के युवाओं के लिए डिजिटल करियर के नए रास्ते

पटना: मेट्रो शहरों की ओर पलायन करने वाले बिहार के युवाओं के लिए एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में आईटी (IT) और डिजिटल सेक्टर की कंपनियों द्वारा तेजी से की जा रही भर्ती ने राज्य के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर ही करियर के नए द्वार खोल दिए हैं।

स्थानीय स्तर पर बढ़ रहे डिजिटल अवसर वर्क फ्रॉम होम, हाइब्रिड मॉडल और छोटे शहरों में टेक हब के विस्तार से बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर जैसे शहरों में आईटी और डिजिटल जॉब्स की मांग बढ़ी है। युवा अब अपने राज्य में रहकर ही वैश्विक कंपनियों और भारतीय स्टार्टअप्स के लिए काम कर रहे हैं।

किन क्षेत्रों में बढ़ी नौकरियां:

  • सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट एवं एआई (AI): वेब डेवलपमेंट, ऐप डेवलपमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में जूनियर्स और मिड-लेवल इंजीनियर्स की मांग।
  • डिजिटल मार्केटिंग एवं कंटेंट क्रिएशन: सोशल मीडिया मैनेजमेंट, SEO, और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में युवाओं को मिल रहे हैं बेहतरीन प्रोजेक्ट्स।
  • डेटा एनालिसिस और क्लाउड कंप्यूटिंग: कंपनियों द्वारा डेटा-ड्रिवन फैसलों के चलते डेटा एनालिस्ट और क्लाउड सपोर्ट रोल्स में भारी बढ़ोतरी।

कम लागत और बेहतर ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ मेट्रो शहरों (जैसे बेंगलुरु, नोएडा या पुणे) के मुकाबले बिहार के शहरों में रहने का खर्च कम है। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से युवाओं को न केवल वित्तीय बचत हो रही है, बल्कि बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस भी मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल साक्षरता अभियानों के साथ-साथ टेक कंपनियों का यह ट्रेंड बिहार को देश का अगला उभरता हुआ डिजिटल हब बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

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