--विज्ञापन यहां--

ऑनलाइन माध्यमों पर बढ़ते साइबर अपराध, ट्रोलिंग और चरित्र हनन की घटनाओं को रोकने के लिए बिहार में दो प्रमुख स्तरों पर सख्त व्यवस्था लागू की गई है:

1. बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) में संशोधन

  • गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई: राज्य कैबिनेट ने बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दी है। अब सोशल मीडिया पर खुलेआम गाली-गलौज, अमर्यादित भाषा, भड़काऊ पोस्ट या साइबर बुलीइंग करने वालों के खिलाफ CCA (गुंडा एक्ट) के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
  • जेल और निरोधात्मक सजा: इस संशोधन के तहत दोषी पाए जाने वाले असामाजिक तत्वों को 6 महीने से लेकर 1 साल तक की जेल या तड़ीपार/निरोधात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
  • त्वरित टेकडाउन आदेश: सोशल मीडिया (फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम आदि) पर विवादित व भ्रामक पोस्ट को तुरंत हटाने के लिए राज्य के रेंज IG और DIG को सीधे टेकडाउन नोटिस जारी करने की शक्ति दी गई है।

2. सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘गंभीर कदाचार’ का नियम

  • विभागीय जांच व निलंबन: यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी सोशल मीडिया पर किसी नागरिक, सहकर्मी या सरकार को ट्रोल करता है, अभद्र टिप्पणी या भड़काऊ कंटेंट शेयर करता है, तो इसे ‘बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली’ के तहत गंभीर कदाचार (Serious Misconduct) माना जाएगा।
  • अनुशासनात्मक परिणाम: ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा सकता है और उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) बैठाकर वेतन वृद्धि रोकने से लेकर बर्खास्तगी तक की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

3. बीएनएस (BNS) और आईटी एक्ट के तहत कानूनी प्रावधान

  • आपराधिक मुकदमे: डिजिटल माध्यमों से महिलाओं या किसी आम नागरिक को धमकाने, स्टॉक करने या उनकी निजता का हनन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और आईटी एक्ट (IT Act) की धाराओं (66E, 67, 67A) के तहत समानांतर रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।

व्हाट्सएप से जुड़ें

अभी जुड़ें

टेलीग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

इंस्टाग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

यह भी पढ़ें