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पटना और बिहार के प्रमुख शहरों में जैविक व पारंपरिक उत्पादों की मांग बढ़ी; मानसून में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी सुपाच्य आहार की सलाह

पटना:

बिहार की राजधानी पटना समेत मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर जैसे प्रमुख शहरों में इन दिनों लोगों की जीवनशैली और खानपान की आदतों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। प्रसंस्कृत (processed) और फास्ट फूड को छोड़कर लोग अब स्थानीय जैविक (Organic) और पारंपरिक उत्पादों जैसे मखाना, जीआई-टैग प्राप्त कतरनी चावल और सत्तू को अपनी दिनचर्या का मुख्य हिस्सा बना रहे हैं।

पारंपरिक व जैविक उत्पादों के प्रति बढ़ता आकर्षण

  • स्थानीय सुपरफूड्स की बढ़ती मांग: एंटीऑक्सीडेंट और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर मखाना, अपनी खास सुगंध के लिए प्रसिद्ध कतरनी चावल और प्रोटीन से भरपूर भुने चने के सत्तू की मांग पटना के स्थानीय बाजारों से लेकर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर काफी बढ़ी है।
  • अंतरराष्ट्रीय पहचान: हाल ही में बिहार के MSME उद्यमियों द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के सत्तू, मखाना और कतरनी चावल को वैश्विक स्तर पर (जैसे वियतनाम व अन्य देशों) भी काफी सराहा गया है।
  • किसानों का रुझान: राज्य सरकार की जैविक प्रोत्साहन योजनाओं और बदलते मौसम के बीच किसानों का ध्यान भी पारंपरिक और क्लाइमेट-रेजिलीनेंट फसलों की ओर बढ़ा है।

मानसून में संतुलित खानपान को लेकर विशेष एडवाइजरी

मानसून के मौसम में नमी (Humidity) बढ़ने के कारण पाचन तंत्र (Digestive System) सुस्त हो जाता है, जिससे पेट के संक्रमण, डिहाइड्रेशन और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी संदर्भ में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पोषण विशेषज्ञों ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

श्रेणीक्या खाएं (सुझाव)क्या न खाएं / बचें
सुपाच्य अनाजरोस्टेड मखाना, सत्तू का शर्बत, हल्का पका कतरनी चावल या दलियाभारी, तैलीय और अत्यधिक मसालेदार भोजन
पेय पदार्थनींबू पानी, सत्तू का पतला शर्बत, हर्बल टी और उबला हुआ पानीसड़क किनारे बिकने वाले खुले पेय और कटे हुए फल
सब्जियां व दालेंताजी और अच्छी तरह धोकर पकाई गई लौकी, तोरई जैसी सुपाच्य सब्जियांमानसून में सड़ने की आशंका वाली कटी हुई या बासी हरी पत्तेदार सब्जियां

विशेषज्ञों का मत

चिकित्सकों के अनुसार, मानसून के समय भारी भोजन के बजाय हल्के, सुपाच्य और प्राकृतिक प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर की इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखता है। सत्तू और मखाना जैसे पारंपरिक उत्पाद न केवल पेट के लिए हल्के होते हैं, बल्कि शरीर को त्वरित ऊर्जा (Instant Energy) भी प्रदान करते हैं।

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