सावन महीने की समाप्ति के बाद अब भाद्रपद (भादों) महीने की शुरुआत के साथ ही त्योहारों का दौर शुरू हो चुका है। बाजारों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और अखंड सौभाग्य के पर्व हरितालिका तीज की तैयारियों को लेकर रौनक काफी बढ़ गई है।

बाजारों में किस तरह की है तैयारी?
- जन्माष्टमी की दुकानें सजीं: बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) की मूर्तियों, उनके लिए आकर्षक झूले, मुकुट, बांसुरी और सुंदर पोशाकों (वस्त्रों) से बाजार पूरी तरह सज चुके हैं। मंदिर और पूजा सामग्रियों की दुकानों पर खरीदारों की चहल-पहल देखने को मिल रही है।
- हरितालिका तीज की खरीदारी: सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे बड़ा पर्व माने जाने वाले हरितालिका तीज को लेकर कपड़ा, ज्वेलरी और सौंदर्य प्रसाधन (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी) की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। महिलाओं ने साड़ियों और पारंपरिक कपड़ों की बुकिंग शुरू कर दी है।
- पूजा सामग्री और टोकरी (पौती) की मांग: हरितालिका तीज के निर्जला व्रत और पूजन के लिए बांस की बनी डलिया (पौती), मिट्टी और बालू के शिवलिंग बनाने के लिए जरूरी बर्तन और धूप-दीप की बिक्री तेज हो गई है।
व्यापारियों में उत्साह
सावन के दौरान धीमे पड़े व्यापार के बाद दुकानदारों और फल-मिठाई व्यवसायियों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है। आने वाले दिनों में जन्माष्टमी और तीज के बाद गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा और दुर्गा पूजा तक बाजारों में इसी तरह की रौनक बनी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।













