
पटना। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और उससे हुई भारी तबाही के बीच भारत की ओर से चलाए जा रहे राहत एवं बचाव प्रयासों की सराहना की गई है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन ने नेपाल की त्रासदी को बेहद गंभीर बताते हुए भारत की भूमिका को ‘संकटमोचक’ करार दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नेपाल को पहुंचाई जा रही मानवीय सहायता और राहत सामग्री की भी सराहना की।
भारत ने निभाई ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका
प्रो. रणवीर नंदन ने कहा कि नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने तेजी से राहत और मानवीय सहायता पहुंचाकर एक जिम्मेदार पड़ोसी और ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, संकट की इस घड़ी में भारत की त्वरित सहायता ने दोनों देशों के बीच मानवीय और सामाजिक संबंधों को और मजबूत किया है।
उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए काठमांडू तक अब तक 68.5 टन राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है। भारत की ओर से राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के प्रयास लगातार जारी हैं।
नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने मचाई भारी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अगस्त के अंतिम सप्ताह में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। इस आपदा में सड़क, पुल, बिजली और जलविद्युत परियोजनाओं सहित कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग मारे गए या लापता हैं और राहत एवं बचाव अभियान कठिन परिस्थितियों में जारी है।
आपदा के बाद भारत समेत कई देशों ने नेपाल के लिए राहत सहायता भेजी है। भारत की ओर से राहत सामग्री और आपात सहायता पहुंचाने के साथ भारतीय नागरिकों तथा श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के प्रयास भी किए गए हैं।
बिहार के लिए भी नेपाल की बाढ़ अहम
नेपाल में आई बाढ़ का असर बिहार के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि नेपाल से निकलने वाली कई नदियां बिहार के मैदानी इलाकों से होकर गुजरती हैं। भारी बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी आने की स्थिति में गंडक, कोसी समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि का खतरा बना रहता है। ऐसे में नेपाल की आपदा पर बिहार की विशेष नजर बनी हुई है।
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षित वापसी को लेकर भी भारत की ओर से प्रयास किए गए हैं। हाल ही में नेपाल में फंसे महाराष्ट्र के करीब 100 तीर्थयात्रियों को बिहार के रास्ते सुरक्षित वापस भेजने में राज्य सरकार ने सहयोग किया।
मानवीय सहायता को बताया भारत की जिम्मेदारी
बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष ने भारत की राहत पहल को केवल पड़ोसी देश की सहायता नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय भारत का तेजी से आगे बढ़ना उसकी ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को भी दर्शाता है।
नेपाल और भारत के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध सदियों पुराने हैं। ऐसे में नेपाल की इस त्रासदी के दौरान भारत की ओर से राहत एवं बचाव कार्यों को बिहार में भी विशेष संवेदनशीलता के साथ देखा जा रहा है।
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