
पटना:
सोशल मीडिया के दौर में खबरें और सूचनाएं जिस तेजी से फैलती हैं, उतनी ही तेजी से भ्रामक और फर्जी खबरें (Fake News) भी वायरल हो जाती हैं। हाल के दिनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों और डीपफेक टूल्स के सुलभ होने से सोशल मीडिया पर फर्जी दावों, एडिटेड तस्वीरों और वॉयस क्लोनिंग वाले वीडियो की संख्या में भारी उछाल आया है। इस स्थिति में सूचनाओं की प्रामाणिकता जांचने यानी ‘फैक्ट-चेक’ (Fact-Check) करने की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
एआई जनरेटेड कंटेंट बना नई चुनौती
तकनीक के दुरुपयोग ने फर्जी खबरों को इतना वास्तविक बना दिया है कि आम यूजर्स के लिए असली और नकली का अंतर पहचानना मुश्किल हो गया है:
- डीपफेक वीडियो और वॉयस क्लोनिंग: राजनेताओं, अभिनेताओं और चर्चित हस्तियों के ऐसे फर्जी वीडियो और ऑडियो बनाए जा रहे हैं जो दिखने और सुनने में बिल्कुल असली लगते हैं।
- भ्रामक दावे और पुराने वीडियो: किसी पुरानी घटना के वीडियो या तस्वीर को बिहार या देश की किसी नई घटना से जोड़कर सोशल मीडिया (WhatsApp, Facebook, X) पर शेयर कर दिया जाता है, जिससे भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा होती है।
- फर्जी साइबर फ्रॉड अलर्ट: एआई-जनरेटेड वॉयस के जरिए अपनों की इमरजेंसी बताकर पैसे ऐंठने वाले गिरोह भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं।
फैक्ट-चेक की 4-स्टेप फॉर्मूला प्रक्रिया
तकनीक विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने आम सोशल मीडिया यूजर्स के लिए ‘स्टॉप, थिंक एंड वेरीफाई’ का फॉर्मूला सुझाया है:
| चरण (Step) | क्या करें? |
| 1. रुकें (Pause) | किसी भी सनसनीखेज, चौंकाने वाली या गुस्से में लाने वाली पोस्ट को तुरंत फॉरवर्ड न करें। |
| 2. स्रोत जांचें (Check Source) | देखें कि क्या यह खबर किसी विश्वसनीय समाचार संस्थान या सरकारी हैंडल पर प्रकाशित हुई है? |
| 3. रिवर्स इमेज सर्च (Reverse Search) | वायरल तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज सर्च में डालकर उसकी पुरानी हिस्ट्री और असलियत चेक करें। |
| 4. ऑफिशियल फैक्ट-चेकर्स | PIB Fact Check, BBC Fact Check या मान्यता प्राप्त मीडिया फैक्ट-चेक डेस्क की पुष्टि का इंतजार करें। |
फर्जी खबर शेयर करने पर कानूनी कार्रवाई
आपदा प्रबंधन और गृह विभाग ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि किए भ्रामक या अफवाह फैलाने वाली पोस्ट शेयर करना अपराध की श्रेणी में आता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के तहत अफवाह फैलाने वाले अकाउंट्स को ब्लॉक करने के साथ-साथ ग्रुप एडमिन्स और यूज़र्स पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
विशेषज्ञों का संदेश:
“एआई के इस युग में ‘देखना ही सच मानना’ नहीं है। हर वायरल पोस्ट के पीछे छिपे तथ्य को आंकना जरूरी है। जब तक आप 100% आश्वस्त न हों, किसी भी संदेश या वीडियो को आगे न बढ़ाएं (फॉरवर्ड न करें)। आपकी एक सतर्कता समाज को अफवाहों से बचा सकती है।”












