पटना/नई दिल्ली (न्यूज़ नेक्स्ट बिहार):
पवित्र सावन महीने के समापन के बाद हिंदू पंचांग के छठे महीने भाद्रपद (भादों) की शुरुआत हो रही है。 धार्मिक दृष्टिकोण से चातुर्मास का यह दूसरा महीना भक्ति, व्रत और त्योहारों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भाद्रपद मास की शुरुआत होते ही देश और बिहार के प्रमुख मंदिरों व पूजा समितियों में वर्ष के सबसे बड़े उत्सवों—श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेशोत्सव (गणेश चतुर्थी) की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं।
📅 भाद्रपद 2026 के मुख्य व्रत और त्योहारों की तिथियां
पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष भाद्रपद महीने में पड़ने वाले प्रमुख पर्वों की तिथियां इस प्रकार हैं:
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार)
- कजरी तीज: 31 अगस्त 2026
- हरितालिका तीज: 14 सितंबर 2026
- गणेश चतुर्थी (गणेशोत्सव प्रारंभ): 14 सितंबर 2026 (सोमवार)
- अनंत चतुर्दशी (गणेश विसर्जन): 25 सितंबर 2026
🛕 मंदिरों में जोरों पर तैयारियां: भव्य पंडाल और लाइटिंग की व्यवस्था
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (4 सितंबर 2026):
- मथुरा, वृंदावन, इस्कॉन मंदिरों के साथ-साथ बिहार की राजधानी पटना के इस्कॉन मंदिर और प्रमुख कृष्ण धामों में जन्माष्टमी की भव्य तैयारियां जारी हैं।
- बाल गोपाल के अलौकिक शृंगार, 56 भोग, और आधी रात (12:00 AM) को महाअभिषेक के लिए विशेष इंतज़ाम किए जा रहे हैं।
- इस बार जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का विशेष जयंती योग बन रहा है।
- गणेश चतुर्थी (14 सितंबर 2026):
- महाराष्ट्र के सिद्धिविनायक और लालबागचा राजा की तर्ज पर अब बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और गया में भी भव्य गणेश पंडालों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
- मूर्तिकारों द्वारा पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं।
- 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव को लेकर सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरें और श्रद्धालुओं की कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
🌟 भाद्रपद मास का धार्मिक महत्व और नियम
शास्त्रों में भाद्रपद शब्द का अर्थ ‘कल्याणप्रद’ या शुभ फल देने वाला माना गया है।
- सात्विक जीवन: इस माह में चातुर्मास के नियमों का पालन करते हुए सात्विक भोजन ग्रहण करने और भगवान विष्णु तथा भगवान गणेश की उपासना का विधान है।
- दान-पुण्य: इस महीने में गुड़, तिल, कपड़े और पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- संयम व साधना: भाद्रपद में मन और शरीर को नियंत्रित रखते हुए भक्ति मार्ग पर चलने से जन्म जन्मांतर के कष्टों से मुक्ति मिलती है।












