
AI से और खतरनाक हो रहे Phishing और Deepfake Scam, CERT-In ने यूजर्स को किया सावधान
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। अब ठग AI की मदद से पहले से ज्यादा भरोसेमंद दिखने वाले Phishing संदेश, नकली वेबसाइट, फर्जी पहचान और Deepfake Voice/Video तैयार कर सकते हैं। इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम CERT-In ने यूजर्स और संगठनों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।
CERT-In की 26 अप्रैल 2026 की advisory में बताया गया है कि AI-generated phishing और impersonation attacks अब अत्यधिक convincing हो सकते हैं। AI की मदद से साइबर अपराधी व्यक्तिगत जानकारी जुटाकर ज्यादा targeted social-engineering attacks भी तैयार कर सकते हैं।
AI से कैसे बदल रहा है Cyber Scam का तरीका?
पहले phishing messages में अक्सर spelling mistakes, खराब भाषा या अजीब links देखकर धोखाधड़ी का अंदाजा लगाया जा सकता था। लेकिन AI ने अपराधियों को ज्यादा professional और context-specific messages बनाने की क्षमता दे दी है।
अब किसी बैंक, कंपनी, सरकारी विभाग या परिचित व्यक्ति की शैली की नकल करते हुए संदेश तैयार किए जा सकते हैं।
CERT-In के अनुसार AI-generated phishing content और fake websites trusted individuals, organisations या services की नकल कर सकते हैं।
Deepfake Voice और Video बना रहे बड़ा खतरा
Deepfake technology के जरिए किसी व्यक्ति के चेहरे या आवाज को manipulate किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल fraud और impersonation के लिए किया जा सकता है।
मान लीजिए किसी व्यक्ति को उसके परिचित की आवाज में कॉल आती है और सामने वाला अचानक पैसे भेजने के लिए कहता है। केवल आवाज पहचान में आने के आधार पर उस व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना अब पर्याप्त नहीं हो सकता।
CERT-In ने खास तौर पर voice calls, video messages और urgent requests की authenticity verify करने की सलाह दी है, खासकर जब मामला पैसे या संवेदनशील जानकारी से जुड़ा हो।
Phishing Link पहले से ज्यादा असली लग सकते हैं
AI की मदद से साइबर अपराधी ऐसे emails और websites तैयार कर सकते हैं जो देखने में वास्तविक कंपनियों या संस्थाओं की official communication जैसी लगें।
इनका उद्देश्य user से:
- Username और password हासिल करना
- Banking information लेना
- OTP या authentication details हासिल करना
- Malicious file download करवाना
- Fake payment page पर ले जाना
हो सकता है।
इसलिए केवल website का design देखकर उसे genuine नहीं मानना चाहिए।
अचानक आए संदेश को तुरंत Action न दें
Cyber criminals अक्सर urgency पैदा करते हैं।
उदाहरण के लिए संदेश में लिखा हो सकता है:
“आपका account आज बंद हो जाएगा।”
“आपका KYC तुरंत पूरा करें।”
“आपके नाम पर legal notice जारी हुआ है।”
“आपके परिवार के सदस्य को emergency में पैसे चाहिए।”
ऐसे संदेशों का उद्देश्य user को सोचने का समय न देना हो सकता है।
CERT-In unsolicited messages, links और attachments से सावधान रहने तथा sensitive information मांगने वाले urgent requests को verify करने की सलाह देता है।
केवल आवाज सुनकर पैसे न भेजें
AI voice cloning के कारण परिचित आवाज जैसी audio तैयार करना संभव है। इसलिए अगर कोई फोन करके पैसे मांगता है तो पहले दूसरे माध्यम से उसकी पहचान verify करें।
उदाहरण के लिए परिवार के किसी सदस्य के नाम से emergency call आए तो उसी नंबर पर भरोसा करने के बजाय उसके किसी दूसरे known number पर call करके पुष्टि करें।
एक अतिरिक्त फोन कॉल हजारों रुपये बचा सकती है।
Social Media पर भी रहें सावधान
AI-generated fake profiles और impersonation accounts के जरिए भी लोगों को निशाना बनाया जा सकता है।
अगर किसी परिचित के नाम से अचानक नया account बनाकर पैसे मांगे जाएं या कोई suspicious link भेजा जाए, तो पहले उस व्यक्ति से किसी दूसरे माध्यम से पुष्टि करें।
अपने social media accounts की privacy settings भी समय-समय पर review करते रहें।
CERT-In की यूजर्स को महत्वपूर्ण सलाह
CERT-In ने individual users के लिए कई basic cyber-security measures अपनाने की सलाह दी है। इनमें operating system और apps को updated रखना, strong और unique passwords इस्तेमाल करना तथा जहां उपलब्ध हो वहां Multi-Factor Authentication (MFA) enable करना शामिल है।
साथ ही users को unverified sources से apps या files download करने से बचने और sensitive personal या financial information को unverified digital channels पर साझा नहीं करने की सलाह दी गई है।
Deepfake को पहचानना हमेशा आसान नहीं
CERT-In की Deepfake advisory के मुताबिक deepfake content तेजी से sophisticated हो रहा है और इसे पहचानना मुश्किल हो सकता है। फिर भी कुछ मामलों में unnatural blinking, lip-sync की गड़बड़ी, चेहरे के expressions, आवाज में असामान्यता, lighting या body movement में inconsistency जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।
लेकिन केवल इन संकेतों के आधार पर किसी video को fake या genuine घोषित करना सही नहीं है। Source verification सबसे महत्वपूर्ण है।
अगर कोई वीडियो या Audio संदिग्ध लगे तो क्या करें?
किसी वायरल video या audio को तुरंत आगे forward करने के बजाय:
पहला: Original source खोजें।
दूसरा: संबंधित व्यक्ति या संस्था के official account से पुष्टि करें।
तीसरा: विश्वसनीय news sources में उसी घटना की रिपोर्ट देखें।
चौथा: पैसे या sensitive information से जुड़ी मांग हो तो अलग माध्यम से verification करें।
पांचवां: संदिग्ध link पर click न करें।
फोन और Apps को Updated रखें
AI-driven cyber attacks तेजी से बदल रहे हैं। CERT-In users को operating systems, browsers और applications में security updates समय पर install करने की सलाह देता है। Automatic updates enable करना भी उपयोगी हो सकता है।
साथ ही अनजान APK या third-party websites से applications install करने से बचना चाहिए।
CERT-In ने इस साल एक अलग advisory में RTO/e-Challan के नाम पर Android malware campaign के बारे में भी चेतावनी दी थी, जिसमें fake messages के जरिए users को malicious APK install करवाने की कोशिश की गई।
Password और MFA को बनाएं सुरक्षा की पहली दीवार
हर account के लिए अलग और मजबूत password रखना चाहिए। जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां Multi-Factor Authentication जरूर enable करें।
इससे केवल password चोरी हो जाने की स्थिति में भी account को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है।
“बहुत अच्छा” Offer भी हो सकता है Scam
AI की मदद से fake offers और promotional messages को भी ज्यादा realistic बनाया जा सकता है।
अगर कोई offer अविश्वसनीय रूप से आकर्षक लगे—जैसे बड़ी रकम का reward, मुफ्त gift या guaranteed investment return—तो बिना verification के उस पर भरोसा न करें।
CERT-In भी users को “too good to be true” offers के प्रति सतर्क रहने की सलाह देता है।
Cyber Safety का Golden Rule
आज के AI दौर में किसी भी digital communication को केवल इसलिए genuine नहीं मानना चाहिए क्योंकि:
- आवाज परिचित है।
- Video बिल्कुल असली दिख रहा है।
- Message professional भाषा में है।
- Logo और document official जैसा दिख रहा है।
- सामने वाला आपका नाम और दूसरी जानकारी जानता है।
इन सभी चीजों की नकल अब पहले की तुलना में आसान हो रही है।
AI Scam से बचने के 10 नियम
- अनजान link पर click न करें।
- OTP, PIN और password कभी साझा न करें।
- Video call पर पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
- अचानक पैसे मांगने पर दूसरे माध्यम से verify करें।
- Suspicious APK या file install न करें।
- हर account में मजबूत और unique password रखें।
- MFA/2FA जरूर enable करें।
- Phone और apps को updated रखें।
- Viral deepfake को बिना verification के share न करें।
- Sensitive information unverified channels पर न दें।
निष्कर्ष
AI ने जहां technology और productivity के नए रास्ते खोले हैं, वहीं इसका इस्तेमाल साइबर अपराध को ज्यादा sophisticated बनाने में भी किया जा रहा है। CERT-In के मुताबिक AI-enabled phishing, impersonation और deepfake-based fraud से individual users भी प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसे समय में सबसे जरूरी सुरक्षा उपाय कोई महंगा software नहीं, बल्कि सतर्कता और verification है।
आवाज परिचित हो सकती है, चेहरा असली जैसा दिख सकता है और message बिल्कुल official लग सकता है—लेकिन बिना verification के भरोसा न करें।
सतर्क रहें। Verify करें। फिर ही Click, Share या Payment करें।













