बिहार में जीविका (BRUPS) के तहत ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए डिजिटलाइजेशन का अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। इस पहल के तहत मुंगेर सहित अन्य जिलों के 800 से अधिक (806) ग्राम संगठनों के सभी वित्तीय लेन-देन की शत-प्रतिशत डिजिटल एंट्री अनिवार्य की गई है।
इस खबर से जुड़े प्रमुख और विस्तृत बिंदु नीचे दिए गए हैं:
📱 लोकॉस (LokOS) ऐप पर होगी शत-प्रतिशत डिजिटल एंट्री
- डिजिटल रजिस्टर: अब ग्राम संगठनों (VO) और जीविका समूहों के पारंपरिक कागजी बही-खातों (रजिस्टरों) के स्थान पर सभी लेन-देन लोकॉस (LokOS) मोबाइल ऐप पर ऑनलाइन दर्ज किए जाएंगे।
- पारदर्शिता और त्वरित निगरानी: लोकॉस ऐप पर डेटा एंट्री होने से जीविका के अधिकारी और कर्मी किसी भी ग्राम संगठन की वित्तीय स्थिति, कुल आय-व्यय, ऋण और पुनर्भुगतान (रिपेमेंट) की सटीक जानकारी एक क्लिक में देख सकेंगे।
- वित्तीय समीक्षा: इससे गड़बड़ियों पर रोक लगेगी और कैडर व समूहों की वित्तीय समीक्षा काफी आसान और व्यवस्थित हो जाएगी।
👨🏫 कैडर और बुककीपरों का विशेष प्रशिक्षण
- रिसोर्स बुककीपर (RBK) की भूमिका: प्रत्येक वित्तीय लेन-देन की एंट्री करने की मुख्य जिम्मेदारी प्रशिक्षित रिसोर्स बुककीपर (RBK) की होगी।
- प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत: मुंगेर के अभिनंदन शिक्षण प्रशिक्षण केंद्र में रिसोर्स बुककीपरों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया है।
- तकनीकी बारीकियों की जानकारी: प्रशिक्षण में कैडरों को ऐप के इस्तेमाल, तकनीकी पहलुओं, लॉगिन प्रक्रिया और लाइव ट्रांजैक्शन एंट्री करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर इसे सफलतापूर्वक लागू कर सकें।
💡 मुख्य लाभ और उद्देश्य
कैशलेस और पारदर्शी व्यवस्था: डिजिटलाइजेशन का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) और ग्राम संगठनों (VO) में वित्तीय अनुशासन लाना तथा महिलाओं को डिजिटल बैंकिंग और तकनीकों से सीधे जोड़ना है।
- तत्काल रिपोर्टिंग: लेन-देन की रसीद और डेटा तुरंत सर्वर पर अपडेट हो जाएगा।
- पारदर्शिता: समूहों की महिलाओं को अपने पैसे और बचत का सटीक हिसाब डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा।
- बैंक लिंकेज और ऋण में आसानी: डिजिटल रिकॉर्ड होने से बैंकों से मिलने वाले क्रेडिट लिंकेज (ऋण) की प्रक्रिया और अधिक तेज व सुगम हो जाएगी।











