
पटना: सावन के बाद अब हिंदू पंचांग का पवित्र भाद्रपद मास शुरू हो गया है। वर्ष 2026 में भाद्रपद मास की शुरुआत 29 अगस्त से हुई है और इस महीने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, ऋषि पंचमी, विश्वकर्मा पूजा और अनंत चतुर्दशी जैसे कई प्रमुख धार्मिक पर्व मनाए जाएंगे। पर्वों की लंबी श्रृंखला को देखते हुए मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर तैयारियां शुरू हो गई हैं।
भाद्रपद मास की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं में धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है। इस महीने का सबसे प्रमुख पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है, जो इस वर्ष 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। बिहार सरकार के 2026 के आधिकारिक कैलेंडर में भी जन्माष्टमी की तिथि 4 सितंबर दर्ज है।
जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में तैयारियां
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बिहार के विभिन्न जिलों के मंदिरों और ठाकुरबाड़ियों में तैयारियां तेज हो गई हैं। मंदिर परिसरों की साफ-सफाई, रंग-रोगन, सजावट और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की विशेष व्यवस्था की जा रही है। कई स्थानों पर झूलनोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी तैयारियां चल रही हैं। गोपालगंज में प्रमुख मंदिरों और बथुआ बाजार में जन्मोत्सव को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिरों में मध्यरात्रि के समय भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार, झांकी, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है।
भाद्रपद में लगातार आएंगे कई बड़े पर्व
भाद्रपद मास में जन्माष्टमी के बाद भी धार्मिक पर्वों का सिलसिला जारी रहेगा। 7 सितंबर को अजा एकादशी, 11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या, जबकि 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। इसी दिन से दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। इसके बाद ऋषि पंचमी समेत अन्य धार्मिक पर्व भी पड़ेंगे।
हरतालिका तीज को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह रहता है। वहीं गणेश चतुर्थी के अवसर पर जगह-जगह भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद विश्वकर्मा पूजा और अनंत चतुर्दशी जैसे पर्व भी धार्मिक माहौल को और भव्य बनाएंगे।
बाजारों में भी बढ़ेगी रौनक
त्योहारों के लगातार आने से बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है। जन्माष्टमी के लिए भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पोशाक, मुकुट, बांसुरी, झूले, पूजा सामग्री और सजावटी सामान की मांग बढ़ने की उम्मीद है। वहीं गणेश चतुर्थी और अन्य पर्वों को लेकर भी पूजा सामग्री की दुकानों पर तैयारियां शुरू हो गई हैं।
भाद्रपद मास धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आने वाले दिनों में मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले आयोजनों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय होने की उम्मीद है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में पितृपक्ष की शुरुआत भी होगी, जिससे धार्मिक आयोजनों का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।













