
उज्जैन/भोपाल: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में कंठाल से छत्री चौक तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत 170 साल पुराने ऐतिहासिक ‘खड़े हनुमान मंदिर’ को स्थानांतरित करने पहुंची नगर निगम और प्रशासन की टीम को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। मंदिर का बाहरी ढांचा तो हटा दिया गया, लेकिन जेसीबी, क्रेन और भारी मशीनों की मदद के बावजूद महाबली हनुमान की करीब 8 फीट ऊंची प्रतिमा को तिल भर भी हिलाया नहीं जा सका।
4 दिनों में 4 नाकाम कोशिशें और आस्था का सैलाब प्रशासन द्वारा प्रतिमा को शिफ्ट करने के लिए लगातार चार दिनों में 4 प्रयास किए गए। इस दौरान कभी बारिश, तो कभी तकनीकी दिक्कतों के कारण काम रोकना पड़ा। भारी मशीनों के असफल होने के बाद और प्रतिमा में दरार (क्रैक) आने के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल मशीनरी का उपयोग रोक दिया है। घटना की खबर फैलते ही मौके पर हजारों श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों की भीड़ जुट गई। भक्तों का कहना है कि यह केवल ढांचा नहीं बल्कि हनुमान जी का अडिग स्थान है।
पुरातत्व विभाग की चेतावनी और विशेष स्कैनिंग मामले में पुरातत्व विभाग की टीम ने भी दखल दिया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगभग 1857 के समय की इस प्राचीन प्रतिमा को जोर-जबरदस्ती या भारी मशीनों से उठाने पर यह खंडित हो सकती है। अब पुरातत्व विभाग की टीम विशेष स्कैनिंग उपकरणों के जरिए जमीन के अंदर प्रतिमा की नींव और स्थिति का अध्ययन करेगी।
टंकी चौक पर पुनर्स्थापना की योजना पर असमंजस प्रशासन की योजना प्रतिमा को विधि-विधान के साथ पास ही स्थित टंकी चौक पर पुनर्स्थापित करने की थी। लेकिन चमत्कारिक रूप से प्रतिमा का न हिलना और श्रद्धालुओं का बढ़ता विरोध प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। फिलहाल प्रतिमा को अस्थायी शेड में सुरक्षित रखा गया है और स्थिति पर तनाव व उत्सुकता बनी हुई है।













