
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष और राजनीतिक विरोधियों के आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। एक चैनल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के दौरान उन्होंने स्पष्ट चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन पर लगे आरोपों को किसी एक भी मामले (केस) में साबित कर दिया जाए, तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
“एक केस में प्रूफ कर दें, संन्यास ले लूंगा” साक्षात्कार के दौरान जब मुख्यमंत्री से विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों और भ्रष्टाचार व आपराधिक मामलों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “अगर कोई मुझ पर लगे एक भी केस में आरोप साबित कर दे, तो मैं राजनीति से संन्यास लेना पसंद करूंगा।” उन्होंने कहा कि वह लोकतंत्र में जनता के प्रति पूरी तरह जवाबदेह हैं और उनकी राजनीति पारदर्शिता पर आधारित है।
लालू परिवार पर साधा निशाना इंटरव्यू में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 1990 के दशक की घटनाओं को याद करते हुए लालू प्रसाद यादव के शासनकाल पर जमकर हमला बोला।
- 1995 के मामले का जिक्र: उन्होंने कहा कि 1995 में लालू यादव की सरकार ने उनके पूरे परिवार को राजनीतिक द्वेष के तहत फंसाने का काम किया था।
- मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई: इस मामले में बाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बिहार सरकार को दोषी पाया था और उनके परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया था।
- उन्होंने आगे कहा कि उस दौर में शरद यादव और नीतीश कुमार जैसे बड़े नेताओं ने भी उनके परिवार के समर्थन में धरना दिया था।
NDA के नेतृत्व पर दिया साफ जवाब नेतृत्व और चुनावी चेहरे से जुड़े सवाल पर सीएम सम्राट चौधरी ने स्थिति साफ करते हुए कहा:
- बिहार में एनडीए के सबसे बड़े नेता नीतीश कुमार हैं।
- आगामी चुनाव और पिछला जनादेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के नाम पर ही रहा है।
- चुनाव हमेशा गठबंधन के चेहरे पर लड़ा जाता है, न कि केवल एक व्यक्ति विशेष के नाम पर।
रोजगार और विकास प्राथमिक एजेंडा राजनीतिक बयानों के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का पूरा ध्यान सरकारी नौकरियों के साथ-साथ युवाओं के लिए स्वरोजगार और औद्योगिक अवसर पैदा करने पर केंद्रित है। इसके अलावा, उन्होंने बाहर रह रहे बिहारवासियों से अपील की कि वे अपनी जन्मभूमि लौटें और राज्य के विकास में अपना योगदान दें।













