
मुंबई: अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी और वैश्विक तनाव के कारण भारतीय रुपये (INR) पर दबाव काफी बढ़ गया है। अंतरबैंकिंग विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 34 पैसे से अधिक टूटकर 95 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर 95.08 से 95.33 के बीच कारोबार करता नजर आया।
रुपये में गिरावट के मुख्य कारण:
- कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के पार: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (US-Iran tensions) के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय बाजार में $100 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है।
- विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली: शेयर बाजार में आई मंदी के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजारों से लगातार पूंजी निकाली है, जिससे मुद्रा बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना है।
- आयात बिल और ट्रेड डेफिसिट में बढ़ोतरी: तेल और अन्य वस्तुओं के महंगे होने से देश का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ने की आशंका गहरा गई है, जिसका सीधा असर घरेलू मुद्रा की मजबूती पर पड़ा है।
आरबीआई की नजर और बाजार का रुख मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) स्थिति पर नजर बनाए हुए है और रुपये की तेज गिरावट को थामने के लिए सीमित स्तर पर डॉलर की बिकवाली कर सकता है। हालांकि, कच्चे तेल के ऊंचे स्तर और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बने रहने तक रुपये में नरमी का रुख जारी रहने का अनुमान है।













