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Asian Games से पहले भारतीय खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और तैयारियों का अंतिम दौर तेज

नई दिल्ली/बेंगलुरु/पटियाला: 19 सितंबर से जापान के आइची-नागोया में शुरू होने वाले एशियन गेम्स 2026 (19 सितंबर – 4 अक्टूबर) के लिए भारतीय एथलीटों की तैयारियों का अंतिम दौर अब बेहद तेज हो गया है। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के बैंगलोर और पटियाला स्थित उत्कृष्टता केंद्रों (NCOE) में खिलाड़ियों को न केवल तकनीकी रूप से बल्कि मानसिक और भौतिक रूप से भी तैयार किया जा रहा है।

हाइलाइट्स और तैयारियों के मुख्य पहलू:

‘स्मार्ट ट्रैक’ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल: SAI बेंगलुरु केंद्र में मध्यम और लंबी दूरी के धावकों (जैसे अविनाश साबले और पारुल चौधरी) के लिए एक विशेष स्मार्ट ट्रैक का उपयोग किया जा रहा है। इसमें रियल-टाइम स्पीड, स्प्लिट टाइमिंग, और स्ट्राइड लेंथ का इलेक्ट्रॉनिक डेटा मिलता है, जिससे एथलीट अपनी टाइमिंग में सुधार कर पा रहे हैं।

कंटेनर रूम्स में रहने का अभ्यास: जापान में इस बार पारंपरिक ‘एथलीट्स विलेज’ न होकर कंटेनर-स्टाइल रूम्स और क्रूज शिप की व्यवस्था की गई है। इसे देखते हुए SAI ने पटियाला और बेंगलुरु में 40 फीट के प्रोटोटाइप ‘शिपिंग कंटेनर रूम्स’ बनाए हैं। खिलाड़ी इसमें रुककर सीमित जगह में ढलने और ‘क्लॉस्ट्रोफोबिया’ से बचने का अभ्यास कर रहे हैं।

जापानी भोजन से तालमेल: खिलाड़ियों को जापान में खान-पान से जुड़ी कोई समस्या न हो, इसके लिए ट्रेनिंग कैंप की डाइट में सुशी (Sushi) जैसे जापानी व्यंजन भी शामिल किए गए हैं।

टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS): केंद्र सरकार की TOPS योजना के तहत खिलाड़ियों की वैज्ञानिक कोचिंग, रिकवरी और मसाज सपोर्ट पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

SAI अधिकारियों और कोचों का कहना है कि इन अनोखी और उन्नत तैयारियों का मकसद खिलाड़ियों को जापान पहुंचने पर किसी भी तरह के सांस्कृतिक, खान-पान या आवास संबंधी ‘सरप्राइज’ या तनाव से बचाना है, ताकि उनका पूरा ध्यान केवल मेडल जीतने पर केंद्रित रहे।

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