--विज्ञापन यहां--

कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव का असर, भारतीय बाजार पर निवेशकों की नजर

नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसके कारण निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है। 2 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ।

बुधवार को सेंसेक्स 373.93 अंक यानी 0.49 फीसदी गिरकर 76,570.35 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 141.35 अंक यानी 0.59 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,914.45 पर आ गया। बाजार में ऑटो, आईटी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों पर दबाव देखा गया।

कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी चिंता

वैश्विक तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1 फीसदी बढ़कर 95.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, जबकि WTI करीब 91.01 डॉलर प्रति बैरल रहा। निवेशकों को आशंका है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने पर तेल की आपूर्ति और परिवहन प्रभावित हो सकता है।

भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहने से देश के आयात बिल, महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ने और आर्थिक विकास पर असर पड़ने की चिंता भी निवेशकों के बीच बनी हुई है।

रुपये और ब्याज दरों पर भी नजर

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती ने भी उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत दिशा और वैश्विक महंगाई के संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। भारत में रिजर्व बैंक भी रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाजार पर नजर रख रहा है।

हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के घरेलू संकेत फिलहाल मजबूत बने हुए हैं। हालिया आंकड़ों में अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही है। इसके बावजूद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेश की दिशा भारतीय बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

निवेशकों के लिए सतर्कता का दौर

बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर अब तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिकी ब्याज दरों और रुपये की चाल पर रहेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में नरमी आती है तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं, संघर्ष के और बढ़ने पर भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता जारी रहने की आशंका है।

व्हाट्सएप से जुड़ें

अभी जुड़ें

टेलीग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

इंस्टाग्राम से जुड़ें

अभी जुड़ें

यह भी पढ़ें