
बिहार में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की नई लहर: 25,000 करोड़ के प्लान और नई नीतियों से बदलेगी तस्वीर
बिहार को एक अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाने और स्थानीय युवाओं को राज्य में ही रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अपनी औद्योगिक नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव लागू किए हैं। उद्योग विभाग द्वारा निवेश बढ़ाने, पारदर्शी व्यवस्था बनाने और भूमि आवंटन की प्रक्रिया को आसान करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
25,000 करोड़ रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और 50 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य
राज्य कैबिनेट ने बिहार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट अथॉरिटी (AIDA) के माध्यम से 25,000 करोड़ रुपये का फंड जुटाने की मंजूरी दी है। इस राशि का मुख्य उपयोग औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भूमि अधिग्रहण करने, एप्रोच रोड बनाने, बिजली-पानी की व्यवस्था सुधारने और आधुनिक प्लग-एंड-प्ले (Plug and Play) शेड तैयार करने के लिए किया जाएगा। सरकार ने अगले पांच वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे राज्य में लगभग 1 करोड़ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
बियाडा (BIADA) की नई भूमि आवंटन नीति 2026
उद्योग लगाने में लालफीताशाही (Red Tape) खत्म करने के लिए बियाडा (BIADA) ने अपनी नई भूमि आवंटन एवं प्रबंधन नीति 2026 लागू की है:
- पारदर्शी और ऑनलाइन प्रक्रिया: अब औद्योगिक प्लॉटों और शेडों का आवंटन पूरी तरह से ऑनलाइन पोर्टल के जरिए ई-ऑक्शन या ई-बिडिंग से हो रहा है।
- स्टार्टअप्स और एमएसएमई (MSME) को राहत: बिहार पंजीकृत स्टार्टअप्स को बयाना राशि (EMD) में पूरी छूट दी गई है, जबकि सूक्ष्म और छोटे उद्योगों के लिए इसे घटाकर 2% कर दिया गया है।
- आसान किस्तें और सख्त समयसीमा: जमीन की लागत का भुगतान आसान किस्तों में करने की छूट दी गई है। साथ ही, जमीन आवंटन के बाद उत्पादन शुरू करने के लिए समयसीमा तय की गई है—सूक्ष्म इकाइयों के लिए 12 महीने और बड़ी इकाइयों के लिए 30 महीने का समय रखा गया है। बंद पड़े प्लॉटों को वापस लेने के लिए सरेंडर और एग्जिट मैकेनिज्म भी बनाया गया है।
इंसेंटिव पैकेज 2025 का विस्तार और विशेष प्रोत्साहन
निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बिहार सरकार ने ‘बिहार इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेन्ट प्रमोशन पैकेज 2025’ की समयसीमा को आगे बढ़ा दिया है। इसके तहत 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक का निवेश करने वाले और कम से कम 1,000 युवाओं को रोजगार देने वाले प्रोजेक्ट्स को मुफ्त जमीन, नेट SGST की 300% तक रीइम्बर्समेंट (14 वर्षों के लिए), कैपिटल सब्सिडी और इंटरेस्ट सबवेंशन जैसी भारी वित्तीय सुविधाएं दी जा रही हैं।
इन नीतिगत सुधारों, टेक्सटाइल, लेदर, एग्रो-प्रोसेसिंग और एथेनॉल सेक्टर पर फोकस के कारण देश के बड़े कॉरपोरेट घराने अब बिहार का रुख कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में राज्य से पलायन रोकने और युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर मिलने की मजबूत उम्मीद जगी है।












