
पटना:
बिहार सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और देश-विदेश के बड़े निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अपनी औद्योगिक नीतियों में व्यापक बदलाव किए हैं। उद्योग विभाग द्वारा लागू की गई नई ‘औद्योगिक प्रोत्साहन नीति’ (Industrial Promotion Policy) के माध्यम से राज्य सरकार ने भरोसा जताया है कि बिहार आने वाले दिनों में पूर्वी भारत का एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब बनकर उभरेगा।
नई नीति के मुख्य आकर्षण और छूट
निवेशकों के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाने और शुरुआती लागत घटाने के उद्देश्य से कई बड़े वित्तीय व प्रशासनिक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं:
- फास्ट-ट्रैक लैंड अलॉटमेंट: बियाडा (BIADA) के औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों को 15 से 30 दिनों के भीतर ऑनलाइन माध्यम से भूमि आवंटन।
- वित्तीय सब्सिडी व कैपिटल सपोर्ट: सूक्ष्म, लघु और बड़े (MSME व Mega) उद्योगों के लिए प्लांट, मशीनरी और बुनियादी ढांचे पर भारी पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy)।
- जीएसटी व स्टांप ड्यूटी में राहत: नए स्थापित होने वाले उद्योगों को निश्चित अवधि तक SGST प्रतिपूर्ति (Reimbursement) और भूमि पंजीकरण पर 100% स्टांप ड्यूटी में छूट।
- बिजली दर और ग्रीन एनर्जी इंसेंटिव: औद्योगिक इकाइयों के लिए रियायती दरों पर बिजली की आपूर्ति तथा सोलर व रिन्यूएबल ऊर्जा का उपयोग करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त इंसेंटिव।
फोकस सेक्टर्स: इन क्षेत्रों में तेजी से आ रहा निवेश
बिहार सरकार ने राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और मानव पूंजी को ध्यान में रखते हुए 5 प्रमुख कोर क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है:
| सेक्टर (Industry Sector) | प्रमुख उत्पाद व संभावनाएं | वर्तमान प्रगति / स्थिति |
| खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) | मखाना, सत्तू, मक्का, कतरनी चावल, फल एवं डेयरी | इथेनॉल प्लांट्स, मखाना प्रोसेसिंग यूनिट्स और मेगा फूड पार्क्स का तेजी से विस्तार। |
| टेक्सटाइल एवं लेदर (Textile & Leather) | रेडीमेड गारमेंट्स, फुटवियर और बैग्स | भागलपुर, गया और मुजफ्फरपुर में ‘टेक्सटाइल पार्क’ व प्लग-एंड-प्ले (Plug & Play) शेड विकसित। |
| बायोफ्यूल्स एवं एग्री-टेक (Bio-Fuels) | एथेनॉल, बायो-गैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर्स | देश के अग्रणी एथेनॉल उत्पादक राज्यों की सूची में बिहार शामिल। |
| लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग | कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन और वेयरहाउस | एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ने के बाद लॉजिस्टिक्स हब के रूप में बड़े निवेश की संभावना। |
‘सिंगल विंडो सिस्टम’ और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
कारोबारियों को लालफीताशाही (Red Tape) से मुक्त वातावरण देने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम 2.0 को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है।
- एक ही छत के नीचे क्लीयरेंस: पर्यावरण मंजूरी (PCB Certificate), बिजली कनेक्शन, फायर NOC और श्रम लाइसेंस अब ऑनलाइन आवेदन के 30 दिनों के भीतर जारी किए जा रहे हैं।
- इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: दरभंगा, गया और पटना के समीप नए औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं ताकि एक्सप्रेसवे और फोर-लेन सड़कों से निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सके।
रोजगार और पलायन पर रोक का लक्ष्य
राज्य के उद्योग मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, नई नीति का मुख्य ध्येय राज्य से कुशल व अकुशल श्रमिकों के पलायन को रोकना है। एमएसएमई और बड़े औद्योगिक घरानों के आने से लाखों स्थानीय युवाओं के लिए direct और indirect रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे बिहार की अर्थव्यवस्था में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।












