
बिहार के कई जिलों में नदियों के उफान और संभावित बाढ़ की स्थिति के बीच साइबर अपराधियों का नया गिरोह सक्रिय हो गया है। ठग अब आपदा प्रभावित परिवारों को मिलने वाली “बाढ़ सहायता राशि” और “फ्री राहत सामग्री” का झांसा देकर लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं। बिहार साइबर पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने आम नागरिकों को सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी है।
ठगी के तरीके: साइबर अपराधी कैसे फंसा रहे जाल?
- फर्जी APK फाइल व मैसेज: व्हाट्सएप और एसएमएस (SMS) पर मैसेज भेजे जा रहे हैं— “मुख्यमंत्री बाढ़ राहत योजना के तहत ₹7,000 की सहायता राशि प्राप्त करने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर फॉर्म भरें।” लिंक पर क्लिक करते ही एक APK फाइल डाउनलोड हो जाती है, जिससे फोन का पूरा कंट्रोल हैकर्स के पास चला जाता है।
- फर्जी कॉल और अधिकारी बनकर ठगी: साइबर अपराधी खुद को ब्लॉक या अंचल कार्यालय (Circle Office) का कर्मचारी बताकर कॉल करते हैं। वे पीड़ितों से आधार नंबर, बैंक खाता संख्या और मोबाइल पर आया OTP मांगते हैं।
- फर्जी क्यूआर कोड (QR Code): राहत दान (Donation) के नाम पर फर्जी सरकारी QR कोड सोशल मीडिया पर शेयर कर लोगों से पैसे ऐंठे जा रहे हैं।
ठगी से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
| क्या करें? | क्या न करें? |
| केवल बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल dbtagriculture.bihar.gov.in या अंचल कार्यालय पर ही भरोसा करें। | अज्ञात नंबर से आए किसी भी लिंक (.apk या SMS) पर भूलकर भी क्लिक न करें। |
| किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए स्थानीय पंचायत सचिव या वार्ड सदस्य से सत्यापन करें। | कॉल पर किसी भी व्यक्ति से अपना OTP, UPI PIN, या ATM कार्ड नंबर साझा न करें। |
| वित्तीय नुकसान होने पर तुरंत अपने बैंक को सूचित कर खाता ब्लॉक करवाएं। | सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी अनधिकृत राहत फंड में पैसे ट्रांसफर न करें। |
ऑनलाइन ठगी होने पर कहां करें शिकायत?
यदि आपके या आपके आसपास किसी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है, तो बिना समय गंवाए गोल्डन आवर (शुरुआती 1 घंटा) के भीतर इन माध्यमों पर शिकायत दर्ज कराएं:
- राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930 पर तुरंत कॉल करें।
- आधिकारिक वेब पोर्टल: cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
- स्थानीय सहायता: अपने नजदीकी साइबर थाना या पुलिस स्टेशन में लिखित आवेदन दें।












