
पंचायतों में अलर्ट और ग्राउंड लेवल निगरानी
- मुखिया और पंचायत सचिवों को निर्देश: अंचल अधिकारियों (CO) और प्रखंड विकास अधिकारियों (BDO) ने गंडक किनारे स्थित सभी पंचायतों के मुखिया, वार्ड सदस्यों और पंचायत सचिवों को अपने-अपने क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखने का निर्देश दिया है।
- तटबंधों पर चौकीदारी: संवेदनशील बांधों और रिंग बांधों की सुरक्षा के लिए जल संसाधन विभाग के अभियंताओं के साथ स्थानीय विकास मित्रों और चौकीदारों की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि कटाव या रिसाव की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम को मिल सके।
- माईकिंग के जरिए मुनादी: दियारा इलाकों और निचले स्थानों पर बसे ग्रामीणों को लाउडस्पीकर के माध्यम से सचेत किया जा रहा है कि वे सुरक्षित व ऊंचे स्थानों पर चले जाएं।
तटीय इलाकों में सुरक्षा इंतजाम और राहत की तैयारी
| गतिविधि / व्यवस्था | प्रशासनिक तैयारी की स्थिति |
| नाव परिचालन | बिना लाइसेंस वाली निजी नावों पर रोक; आपात स्थिति के लिए सरकारी नावें तैनात। |
| रेस्क्यू टीम | बगहा, नौतन, पिपरासी और गोपालगंज के कुचायकोट में SDRF की टीमें अलर्ट। |
| शरण स्थल एवं भोजन | ऊंचे विद्यालयों और पंचायत भवनों में राहत शिविर और कम्युनिटी किचन की तैयारी। |
| स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा | ब्लीचिंग पाउडर, ओआरएस पैकेट, सांप काटने की दवाएं और मवेशियों के चारे का भंडारण। |
ग्रामीणों के लिए आपदा प्रबंधन की सलाह
- नदी की तरफ न जाएं: मवेशियों को चराने या सूखी लकड़ी इकट्ठा करने के उद्देश्य से नदी के तेज बहाव के करीब न जाएं।
- अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें और केवल जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें।
- आपातकालीन संपर्क: किसी भी कटाव या जलभराव की समस्या होने पर तुरंत पंचायत प्रतिनिधि या जिला आपदा हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।












