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पटना साइबर पुलिस का बड़ा एक्शन: बिहटा से ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 1.5 करोड़ के फर्जी लेन-देन का खुलासा

बिहार में साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के जरिए लोगों को ब्लैकमेल करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोहों पर नकेल कसने के लिए साइबर पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी सफलता हासिल की है। पटना साइबर पुलिस ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से मिली गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बिहटा थाना क्षेत्र के राघोपुर स्थित एसएस कॉलोनी में छापेमारी कर साइबर गिरोह के मुख्य हैंडलर को दबोच लिया।

गिरफ्तारी और बरामदगी का विवरण

आरोपी की पहचान: गिरफ्तार आरोपी की पहचान बिहटा निवासी कुमार आर्यन (पिता: रामजी सिंह) के रूप में हुई है, जो इलाके में पोल्ट्री फार्म चलाता था और बैंकों से लोन दिलाने का काम करता था।

जब्त सामान: पुलिस ने आरोपी के पास से ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 2 मोबाइल फोन, 4 सिम कार्ड, फर्जी बैंक खातों की पासबुक, एटीएम/डेबिट कार्ड और चेकबुक बरामद की है।

CBI अफसर बनकर व्यवसायी से 1.43 करोड़ की ठगी

जांच में सामने आया कि इस साइबर सिंडिकेट ने आंध्र प्रदेश के एक बड़े व्यवसायी को सीबीआई (CBI) और केंद्रीय जांच एजेंसियों का फर्जी अधिकारी बनकर संपर्क किया। फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध खातों में नाम होने का डर दिखाकर पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया गया और डरा-धमकाकर 1.43 करोड़ रुपये से अधिक की रकम वसूल ली गई।

₹1.05 करोड़ का ट्रांजैक्शन: व्यवसायी से ठगी गई कुल रकम में से लगभग 1.05 करोड़ रुपये सीधे कुमार आर्यन और उसके सहयोगी के संयुक्त खाते (Mule Account) में ट्रांसफर कराए गए थे। ₹27 लाख तुरंत फ्रीज: जांच अधिकारी दानापुर डीएसपी-2 अमरिंदर कुमार झा ने बताया कि खाते से लगभग 78 लाख रुपये निकाले जा चुके थे, जबकि शेष बचे ₹27 लाख को पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बैंक के माध्यम से तत्काल प्रभाव से फ्रीज (Hold) करा दिया है।

1% कमीशन पर लखनऊ से संचालित होता था नेटवर्क

पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी कुमार आर्यन ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

फेसबुक विज्ञापन से जुड़ाव: आर्यन ने फेसबुक पर “करंट अकाउंट से पैसा कमाएं” का विज्ञापन देखा था। संपर्क करने पर साइबर अपराधियों ने उसे हवाई टिकट भेजकर पटना से लखनऊ बुलाया। कमीशन का खेल: लखनऊ में साइबर माफियाओं के साथ हुई डील के तहत आर्यन ने अपना करंट बैंक खाता 1% के कमीशन पर साइबर ठगों को सौंप दिया, जिसका इस्तेमाल देश भर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुटाई गई काली कमाई को रूट करने के लिए किया जा रहा था।

पुलिस की अपील और एडवाइजरी

साइबर पुलिस और डीएसपी ने स्पष्ट किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी पुलिस, सीबीआई या ईडी का अधिकारी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं करता और न ही पैसे की मांग करता है।

यदि कोई भी संदिग्ध आपको ऐसा डर दिखाए या साइबर ठगी का प्रयास करे, तो तुरंत घबराने के बजाय राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

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