
गयाजी:
पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए विश्व प्रसिद्ध गयाजी पितृपक्ष महासंगम मेला 2026 की तैयारियां जिला प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस 16 दिवसीय पावन मेले में भारत के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी लाखों तीर्थयात्रियों के पहुंचने की संभावना है। देश-दुनिया से आने वाले पिंडदानियों और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए गया जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने अभी से रूपरेखा तैयार कर विभिन्न विभागों को जिम्मेदारी सौंप दी है।
प्रशासनिक व्यवस्था और 21 कोषांगों का गठन
मेले के सुगम और व्यवस्थित संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा 21 अलग-अलग विशेष कोषांगों (Cells) का गठन किया गया है। इनमें आवासन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, यातायात, विद्युत, पेयजल, सुरक्षा और नियंत्रण कक्ष जैसे प्रमुख विभाग शामिल हैं। सभी कोषांगों में वरीय अधिकारियों की तैनाती की गई है, जिन्हें समयबद्ध तरीके से सभी बुनियादी ढांचागत कार्यों को पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही प्रशासन ने आम जनता और तीर्थयात्रियों से व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए ईमेल के जरिए सुझाव भी आमंत्रित किए हैं।
आवासन और ‘टेंट सिटी’ का निर्माण
- विशाल ठहरने की व्यवस्था: श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए शहर के सभी प्रमुख होटलों, धर्मशालाओं, गेस्ट हाउसों, सरकारी व गैर-सरकारी विद्यालयों तथा महाविद्यालयों को चिह्नित किया जा रहा है।
- टेंट सिटी का विकास: तीर्थयात्रियों की अत्यधिक भीड़ को देखते हुए गांधी मैदान और अन्य खुले स्थानों पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्थायी ‘टेंट सिटी’ विकसित की जाएगी।
- जर्जर भवनों पर प्रतिबंध: सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि किसी भी जर्जर या असुरक्षित भवन में श्रद्धालुओं को ठहरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सभी आवासन स्थलों पर पेयजल, शौचालय, रोशनी और पंखों की समुचित व्यवस्था अनिवार्य की गई है।
घाटों, वेदियों और फल्गु नदी की विशेष सुरक्षा
- फल्गु नदी व गयाजी डैम: प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी के घाटों, अक्षयवट और विभिन्न वेदियों की सफाई व मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है। फल्गु नदी में बने गयाजी डैम के पानी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए विशेष तंत्र स्थापित किया जा रहा है।
- बैरिकेडिंग और सुरक्षा संकेत: वैतरणी तालाब और अन्य गहरे पानी वाले घाटों पर 3 फीट के आसपास पानी के स्तर को देखते हुए लोहे की बैरिकेडिंग और खतरे के लाल झंडे लगाए जा रहे हैं, ताकि कोई भी श्रद्धालु गहरे पानी में न जाए। घाटों की सीढ़ियों से काई (Moss) हटाने और फिसलन रोधी टाइल्स लगाने का काम जारी है।
स्वास्थ्य, स्वच्छता और पेयजल आपूर्ति
- 24/7 चिकित्सा शिविर: विष्णुपद मंदिर परिसर, प्रमुख वेदियों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर 24 घंटे कार्यरत स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इनमें पर्याप्त संख्या में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, जीवनरक्षक दवाएं और एम्बुलेंस तैनात रहेंगी।
- स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था: मेला क्षेत्र में हर 200 से 500 मीटर की दूरी पर शुद्ध पेयजल और आरओ वॉटर टैंकर की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा मोबाइल टॉयलेट और अस्थायी शौचालयों का निर्माण भी कराया जा रहा है, जिनकी नियमित सफाई की जाएगी।
हाई-टेक सुरक्षा, यातायात और डिजिटल हेल्पडेस्क
- सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी: पूरे मेला क्षेत्र, संकीर्ण गलियों और संवेदनशील स्थलों की निगरानी के लिए सैकड़ों सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। सुरक्षा बल, दंडाधिकारी और त्वरित कार्य बल (RAF) की भारी तैनाती रहेगी।
- ट्रैफिक और पार्किंग प्लान: शहर के बाहरी हिस्सों में भारी वाहनों और बसों के लिए समर्पित पार्किंग स्थल बनाए जा रहे हैं ताकि शहर के भीतर जाम की स्थिति न बने।
- डिजिटल ऐप और खोया-पाया केंद्र: देश-विदेश से आने वाले यात्रियों के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप और आधिकारिक पोर्टल अपडेट किया जा रहा है, जिसमें पंडा-पुरोहितों की जानकारी, वेदियों के रास्ते, होटल-धर्मशाला की दरें और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर दर्ज होंगे। परिजनों से बिछड़े लोगों को मिलाने के लिए 24 घंटे खोया-पाया केंद्र और नियंत्रण कक्ष संचालित रहेगा।













