मुंगेर (NewsNxtBihar): विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय के पादुका दर्शन स्थित संन्यास पीठ में चातुर्मास अनुष्ठान के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि निष्काम सेवा, त्याग, भक्ति और वैराग्य ही मानव जीवन में आध्यात्मिक साधना और आत्मशुद्धि के सच्चे आधार हैं।

🧘♂️ निष्काम सेवा: स्वयं को भीतर से बदलने की साधना
स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने सेवा के वास्तविक अर्थ को रेखांकित करते हुए कहा कि सेवा केवल किसी दूसरे की सहायता भर करना नहीं है, बल्कि यह स्वयं को भीतर से रूपांतरित करने की एक गहरी साधना है।
- अहंकार का त्याग: निष्काम भाव से किए गए कर्म में सहायता तो होती है, लेकिन उपकार या कर्ता होने का अहंकार नहीं होता।
- चित्त की निर्मलता: जब मनुष्य बिना किसी स्वार्थ या फल की इच्छा के कर्म करता है, तो उसके मन की संकीर्णता और नकारात्मकता दूर होती है तथा हृदय में नम्रता व कृतज्ञता का भाव जागृत होता है।
🔱 भक्ति केवल कर्मकांड नहीं, प्रेम और करुणा का विकास
आध्यात्मिक सत्र के दौरान स्वामी जी ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के अंतर-संबंधों की व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति केवल पूजा-पाठ या बाहरी कर्मकांडों तक सीमित नहीं है।
“भक्ति का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य की भावनाओं को परिष्कृत और निर्मल बनाकर उनमें प्रेम, करुणा और सकारात्मकता का संचार करना है। जब तक विचार और भावनाएं निर्मल नहीं होंगी, तब तक ईश्वर-भक्ति सहज रूप से प्राप्त नहीं हो सकती।” — परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती
💡 व्यावहारिक वैराग्य और आत्मशुद्धि का संकल्प
- आसक्ति से मुक्ति ही वैराग्य: वैराग्य का अर्थ घर-परिवार या संसार को छोड़ना नहीं, बल्कि चीजों और संबंधों के प्रति अत्यधिक मोह व आसक्ति के बंधन से मुक्त होना है।
- सतत प्रक्रिया है आत्मशुद्धि: स्वामी जी ने कहा कि आत्मशुद्धि कोई एक दिन में होने वाली घटना नहीं है। इसके लिए हर दिन एक छोटा संकल्प लेकर उसे पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए। निरंतर अभ्यास ही विचार, व्यवहार और जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाता है।
🌺 भजन-संकीर्तन से भक्तिमय हुआ परिसर
कथा प्रसंगों के दौरान मानस कोकिला कृष्णा मिश्रा के सुमधुर भजनों और संकीर्तन ने संपूर्ण संन्यास पीठ परिसर को आध्यात्मिक रस में डुबो दिया। इस अनुष्ठान में देश-विदेश से पहुंचे सैकड़ों साधकों ने भाग लेकर गुरु-वाणी और भागवत कथा का आनंद उठाया।













