भागलपुर/पूर्णिया/मुंगेर:
अंग प्रदेश और पूर्वोत्तर बिहार की लोक संस्कृति, नारी शक्ति तथा अटूट पति-भक्ति का प्रतीक बिहुला-विषहरी पूजा व नागपंचमी का त्योहार राज्यभर में अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, बांका और मुंगेर सहित पूरे क्षेत्र में सुबह से ही शिवालयों और मां विषहरी के मंदिरों में माता मंसा और भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
180 से अधिक पूजा पंडालों में गूंजे पारंपरिक भक्ति गीत
अंग संस्कृति के केंद्र भागलपुर में अकेले 182 से अधिक स्थानों पर माता विषहरी की भव्य प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई। ऐतिहासिक चंपानगर मनसा मंदिर, परबत्ती, रामसर, इशाकचक, भीखनपुर और बरारी रिफ्यूजी कॉलोनी में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा।
- पवित्र कलश शोभायात्रा: महिलाओं ने पवित्र नदियों और घाटों से गंगाजल भरकर भव्य कलश यात्राएं निकालीं।
- पारंपरिक डलिया व बारात अनुष्ठान: देर रात पारंपरिक विधि-विधान के साथ बिहुला और बाला लखेंद्र के विवाह तथा विषहरी बारात का अनोखा धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ।
- मंजूषा कला की छाप: पूजा स्थलों पर बिहार की प्रसिद्ध मंजूषा चित्रकला से सजे डोले, कलश और बिहुला-लखेंद्र की लोकगाथा को दर्शाती कलाकृतियां श्रद्धालुओं का मन मोह रही थीं।
मेलों में उमड़ा जनसैलाब, झूले और हस्तशिल्प बने आकर्षण
पूर्णिया और बांका के श्याम बाजार सहित कई ग्रामीण व शहरी इलाकों में तीन दिवसीय पारंपरिक मेलों का आयोजन किया गया। मेले में तारामाची, ब्रेकडांस झूले, मीना बाजार और स्थानीय व्यंजनों की दुकानों पर बच्चों व महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई।
लोकगाथा की महत्ता: मान्यता है कि सती बिहुला ने अपने पति लखेंद्र को नागदंश से बचाने के लिए यमराज और देवी विषहरी से संघर्ष कर उनके प्राण वापस पाए थे। नागपंचमी और विषहरी पूजा के दिन नाग देवता व देवी मंसा की पूजा करने से सर्पदंश से रक्षा और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन की ओर से प्रमुख मंदिरों और घाटों पर बैरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरे तथा पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पूजा समापन के पश्चात पारंपरिक रीति-रिवाज से मंजूषा और मूर्तियों के विसर्जन के साथ ही यह लोक महापर्व संपन्न हुआ।












