ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फेक जॉब ऑफर्स (Work from Home Scams) और सोशल मीडिया अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर पुलिस और बिहार पुलिस की साइबर सेल ने राज्यभर में व्यापक सतर्कता दिशा-निर्देश (Guidelines) और नई एडवाइजरी जारी की है।

प्रशासन द्वारा जारी इस एडवाइजरी और नई व्यवस्था का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:
🚨 आपातकालीन साइबर हेल्पलाइन और शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था
- हेल्पलाइन नंबर 1930 (24×7): किसी भी तरह की ऑनलाइन वित्तीय ठगी या साइबर अपराध होने पर तुरंत टोल-फ्री राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। ठगी के शुरुआती 1-2 घंटे (Golden Hours) के भीतर शिकायत दर्ज कराने पर फ्रॉड की गई राशि को आरोपी के बैंक खाते में ही होल्ड (ब्लॉक) कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
- ऑनलाइन पोर्टल: नागरिक अपनी शिकायत सीधे राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर दर्ज करा सकते हैं।
- जिला साइबर थाना: बिहार के सभी जिलों में अलग से साइबर पुलिस स्टेशन कार्यरत हैं, जहाँ जाकर भी पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
⚠️ प्रमुख साइबर फ्रॉड के तरीके और पुलिस की गाइडलाइन्स
1. पार्ट-टाइम / फेक जॉब ऑफर (Fake Job Scams)
- मोडस ऑपरेंडी: टेलीग्राम (Telegram) या व्हाट्सएप (WhatsApp) के जरिए YouTube वीडियो लाइक करने, गूगल रिव्यू देने या घर बैठे पैकिंग का काम देकर शुरुआत में छोटे-छोटे लाभ दिए जाते हैं। बाद में प्रीपेड टास्क के नाम पर लाखों रुपये निवेश कराकर ठगी की जाती है।
- एडवाइजरी: पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी प्रामाणिक कंपनी काम देने के बदले पैसे (Security Deposit/Prepaid Task) नहीं मांगती। अज्ञात टेलीग्राम ग्रुप्स और अनजान ऑफर्स से दूर रहें।
2. डिजिटल अरेस्ट एवं सीबीआई/पुलिस के नाम पर फर्जी कॉल
- मोडस ऑपरेंडी: साइबर अपराधी खुद को सीबीआई, कस्टम, ईडी या पुलिस अधिकारी बताकर कॉल करते हैं और पार्सल में अवैध सामान या परिजनों के किसी केस में फंसने का डर दिखाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर पैसे ऐंठते हैं।
- एडवाइजरी: पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ या ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने की मांग नहीं करती। ऐसा कॉल आने पर तुरंत कॉल काटें और 1930 पर रिपोर्ट करें।
3. फर्जी एपीके (APK) फाइल्स और मैसेज लिंक
- मोडस ऑपरेंडी: व्हाट्सएप या एसएमएस पर ‘बिजली बिल अपडेट’, ‘पैन-आधार लिंक’, ‘लकी ड्रॉ’ या ‘ई-चालान’ के नाम पर अज्ञात APK फाइल या लिंक भेजे जाते हैं। डाउनलोड करते ही फोन हैक हो जाता है और बैंक डिटेल चोरी हो जाती है।
- एडवाइजरी: किसी भी अनजान लिंक या अनधिकृत ऐप (APK) को फोन में इंस्टॉल न करें। केवल गूगल प्ले स्टोर या ऑफिशियल ऐप स्टोर से ही ऐप्स डाउनलोड करें।
🛡️ बचाव के मुख्य ‘गोल्डन रूल्स’ (Safety Checklist)
- OTP और PIN शेयर न करें: बैंक अधिकारी, पुलिस या कोई भी विश्वसनीय संस्था कभी भी आपसे OTP, UPI Pin या CVV नहीं मांगती।
- स्क्रीनशॉट और सबूत सुरक्षित रखें: ठगी होने पर आरोपी के मैसेज, व्हाट्सएप चैट, मोबाइल नंबर, ट्रांजैक्शन आईडी (Transaction ID) और बैंक स्टेटमेंट के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
- 2-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करें: अपने व्हाट्सएप, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर 2-Step Verification ज़रूर ऑन रखें।













