
नई दिल्ली। बच्चों की पढ़ाई और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना ही जरूरी नहीं है। पर्याप्त और नियमित नींद भी बच्चों की सीखने की क्षमता, ध्यान, याददाश्त और स्कूल में प्रदर्शन से गहराई से जुड़ी हुई है। वहीं, देर रात तक मोबाइल, टैबलेट, टीवी या वीडियो गेम का इस्तेमाल बच्चों की नींद की अवधि और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
हालिया शोध और विशेषज्ञों की सलाह से यह बात सामने आती है कि बच्चों की दिनचर्या में नींद, पढ़ाई और स्क्रीन टाइम के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, 6 से 13 वर्ष के बच्चों को आमतौर पर रात में 9 से 11 घंटे और 14 से 17 वर्ष के किशोरों को 8 से 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए। पर्याप्त नींद बच्चों के स्कूल प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
देर रात तक मोबाइल चलाना क्यों बन सकता है समस्या?
आज बच्चों की पढ़ाई का एक हिस्सा डिजिटल डिवाइस पर निर्भर है। ऑनलाइन क्लास, ई-बुक, शैक्षणिक वीडियो और इंटरनेट रिसर्च पढ़ाई में मदद करते हैं। लेकिन पढ़ाई के अलावा सोशल मीडिया, गेमिंग और मनोरंजन के लिए लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करने से समस्या बढ़ सकती है।
खासकर सोने से ठीक पहले मोबाइल या अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल बच्चों को अधिक alert रख सकता है। स्क्रीन का इस्तेमाल सोने का समय आगे बढ़ा सकता है और कुल नींद की अवधि कम कर सकता है। शोध में स्क्रीन के इस्तेमाल और कम या खराब नींद के बीच संबंध पाया गया है।
नींद कम होने से पढ़ाई पर क्या असर पड़ता है?
जब बच्चा नियमित रूप से पर्याप्त नींद नहीं लेता, तो अगले दिन उसका ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। थकान के कारण कक्षा में एकाग्रता, नई जानकारी को समझने और याद रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
नींद बच्चों के cognitive functioning यानी सोचने-समझने की क्षमता और व्यवहार से भी जुड़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त और नियमित नींद बच्चों के overall development के लिए महत्वपूर्ण है।
एक अध्ययन में किंडरगार्टन के बच्चों में नियमित रूप से कम से कम 10 घंटे सोने को बेहतर व्यवहार, स्कूल readiness और academic performance से जोड़ा गया था।
सिर्फ पढ़ाई के घंटे बढ़ाना हमेशा समाधान नहीं
परीक्षा के दौरान कई बच्चे देर रात तक पढ़ाई करते हैं और नींद के घंटों को कम कर देते हैं। उन्हें लगता है कि ज्यादा घंटे पढ़ने से तैयारी बेहतर होगी। लेकिन लगातार नींद कम करके पढ़ना लंबे समय में उल्टा असर डाल सकता है।
आज प्रकाशित एक अध्ययन में भी कम सोने वाले कॉलेज छात्रों में नींद बढ़ाने और बेहतर academic outcomes के बीच संबंध पाया गया। अध्ययन का संदेश यही है कि पढ़ाई के अतिरिक्त घंटे हासिल करने के लिए नींद को लगातार कम करना जरूरी नहीं कि बेहतर परिणाम दे।
इसलिए बच्चों और किशोरों के लिए “ज्यादा घंटे पढ़ना” से ज्यादा जरूरी “सही समय पर पढ़ना और पर्याप्त आराम करना” हो सकता है।
स्क्रीन टाइम और नींद का सीधा संबंध
स्क्रीन टाइम केवल नींद के समय को कम नहीं करता, बल्कि सोने की routine को भी प्रभावित कर सकता है। रात में गेमिंग, सोशल मीडिया, वीडियो या चैटिंग जैसी गतिविधियां बच्चों को देर तक जागने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, बच्चों के bedroom में स्क्रीन की मौजूदगी और अधिक screen exposure को कम sleep duration से जोड़ा गया है।
2026 में प्रकाशित एक longitudinal study ने भी बच्चों के शुरुआती वर्षों में screen viewing और बाद के academic performance तथा working memory के बीच संबंध का अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ उम्र के चरणों में अधिक screen viewing बाद के academic outcomes से जुड़ा था। हालांकि, ऐसे observational शोध से केवल संबंध पता चलता है, हर मामले में सीधा कारण-परिणाम साबित नहीं होता।
बच्चों के लिए कैसी होनी चाहिए रात की routine?
माता-पिता बच्चों की नींद सुधारने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाने में मदद कर सकते हैं:
1. सोने और उठने का समय तय करें
हर दिन लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की आदत बनाएं।
2. सोने से पहले स्क्रीन कम करें
रात में सोने के समय के करीब मोबाइल, टीवी और गेमिंग को सीमित करना मददगार हो सकता है।
3. मोबाइल को bedroom से बाहर रखें
बच्चे के बिस्तर के पास फोन रखने से देर रात तक notifications, messages या videos देखने की संभावना बढ़ सकती है।
4. पढ़ाई का समय पहले तय करें
होमवर्क और परीक्षा की तैयारी को देर रात तक खींचने के बजाय शाम के समय व्यवस्थित करने की कोशिश करें।
5. सोने से पहले शांत माहौल बनाएं
हल्की reading, बातचीत या दूसरी शांत गतिविधियां bedtime routine का हिस्सा बनाई जा सकती हैं।
पढ़ाई के लिए “Sleep + Study + Screen” का संतुलन जरूरी
बच्चों की शिक्षा में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसलिए लक्ष्य स्क्रीन को पूरी तरह हटाना नहीं, बल्कि उसका सही और उद्देश्यपूर्ण इस्तेमाल करना होना चाहिए।
ऑनलाइन पढ़ाई और educational content उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन recreational screen time को पढ़ाई, शारीरिक गतिविधि और नींद की कीमत पर नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की दिनचर्या में पर्याप्त नींद, नियमित physical activity, संतुलित पढ़ाई और नियंत्रित screen use का संतुलन उनके overall well-being के लिए महत्वपूर्ण है।
माता-पिता के लिए जरूरी संदेश
अगर बच्चा देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करता है, सुबह उठने में परेशानी होती है, दिन में लगातार थका हुआ रहता है या पढ़ाई के दौरान ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता, तो उसकी पूरी daily routine पर ध्यान देना जरूरी है।
केवल पढ़ाई के घंटे बढ़ाने के बजाय यह देखना भी जरूरी है कि बच्चा कितना सो रहा है, कब सो रहा है और सोने से पहले क्या कर रहा है।
निष्कर्ष
बच्चों की पढ़ाई में सफलता केवल किताबों के सामने बिताए गए घंटों पर निर्भर नहीं करती। अच्छी नींद दिमाग को आराम देने के साथ सीखने, ध्यान और याददाश्त के लिए भी महत्वपूर्ण है।













