बिहार में आगामी पंचायत चुनावों और पंचायतों के नए सिरे से परिसीमन (Delimitation) को लेकर राज्य सरकार तथा पंचायती राज विभाग की ओर से स्पष्ट संकेत दिए गए हैं:
📌 मुख्य बिंदु और मंत्री का बयान
1. 2011 की जनगणना के आधार पर नया परिसीमन
- कैबिनेट की मुहर: बिहार कैबिनेट की बैठक में वर्ष 2011 की जनसंख्या को आधार मानते हुए ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन कराने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई है।
- 35 वर्षों बाद बड़ा फैसला: बिहार में करीब 35 वर्षों के बाद पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिससे पंचायतों का पुनर्गठन होगा और विकास योजनाओं का लाभ बेहतर ढंग से पहुँचेगा।
2. चुनाव और परिसीमन की प्रक्रिया
- परिसीमन के बाद ही चुनाव: पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि 2011 की जनगणना के आधार पर पहले परिसीमन (Delimitation) कराया जाएगा और उसके बाद नए सिरे से आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा।
- राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका: परिसीमन की अधिसूचना और मैपिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तिथियों और अधिसूचना की ओर आगे बढ़ेगा।
3. आरक्षण और रोस्टर में बदलाव
- परिसीमन की वजह से कई ग्राम पंचायतों की भौगोलिक सीमाएँ बदलेंगी।
- सीमांकन में बदलाव के कारण इस बार आरक्षण की सीटों और रोस्टर में बड़ा फेरबदल होना तय माना जा रहा है।
💡 पंचायती राज व्यवस्था में अन्य बड़े बदलाव
वित्तीय स्वायत्तता: परिसीमन के साथ ही कैबिनेट ने ‘ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली’ को भी मंजूरी दी है, जिससे पंचायतें अब होल्डिंग टैक्स, विज्ञापनों और स्थानीय सेवाओं पर फीस/टैक्स वसूल सकेंगी।
- निष्कर्ष: परिसीमन, सीमा निर्धारण और आरक्षण रोस्टर फाइनल होने की प्रक्रिया के कारण पंचायत चुनावों की आधिकारिक घोषणा में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन पंचायती राज विभाग तैयारियों को तेजी से पूरा करने में जुटा है।












