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बिहार के बाढ़ प्रभावित गांवों में बढ़ी मुश्किलें, गंगा-पुनपुन के उफान से दियारा क्षेत्रों में संपर्क प्रभावित

पटना: बिहार में लगातार बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। गंगा और पुनपुन समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि से निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में पानी फैलने लगा है। पटना के दानापुर और मनेर दियारा में कई गांवों का मुख्य इलाकों से संपर्क प्रभावित हुआ है, जबकि खेतों में पानी भरने से फसल और सब्जियों की खेती को भी नुकसान पहुंच रहा है।

गंगा और पुनपुन के बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चिंता

जल संसाधन विभाग के बाढ़ पूर्वानुमान आंकड़ों के अनुसार 1 सितंबर को पटना के गांधीघाट पर गंगा 49.41 मीटर पर बह रही थी, जबकि यहां खतरे का निशान 48.60 मीटर है। दीघाघाट में जलस्तर 50.48 मीटर दर्ज किया गया, जो 50.45 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है। मनेर में सोन नदी का जलस्तर भी 52.19 मीटर दर्ज हुआ, जो 52 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है। पुनपुन नदी के श्रीपालपुर और किंजर केंद्रों पर भी जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया।

दानापुर-मनेर दियारा में कई गांव प्रभावित

गंगा का पानी बढ़ने से दानापुर और मनेर के निचले दियारा क्षेत्रों में बाढ़ का पानी फैल रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक दानापुर दियारा की पुरानी पानापुर, कासिमचक, हेतनपुर, गंगहारा, पतलापुर और मानस पंचायतों के कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है। पानी से घिरे इलाकों में लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से मुश्किल बनी हुई है।

मनेर की किता चौहत्तर पूर्वी, पश्चिमी और मध्य पंचायतों के साथ मगरपाल पंचायत के कई गांवों में भी बाढ़ का पानी पहुंचने की सूचना है। बदल टोला, नयका टोला, पुरनका टोला, रामनगर, हरिजन टोली, इस्लामगंज और दुधइला जैसे इलाकों में जलजमाव से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।

पुनपुन के किनारे बसे गांवों में भी संकट

पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर का असर पटना और आसपास के निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। सबलपुर, मोहनपुर सहित कई गांवों के निचले हिस्सों में पानी पहुंचने से खेत प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के पानी के कारण सब्जियों की खेती को नुकसान और पशुओं के लिए चारे की समस्या भी सामने आ रही है।

सिर्फ पटना ही नहीं, कई जिलों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार के अन्य हिस्सों में भी बाढ़ की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। सरकारी बाढ़ पूर्वानुमान के अनुसार गंडक नदी डुमरियाघाट में, कोसी बीरपुर में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में, पुनपुन श्रीपालपुर में और गंगा के कई केंद्रों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। भागलपुर, बक्सर, खगड़िया, सुपौल और पश्चिम चंपारण समेत कई जिलों में प्रशासन को सतर्क रखा गया है।

संपर्क मार्ग डूबने से बढ़ी परेशानी

बाढ़ का सबसे बड़ा असर ग्रामीण संपर्क व्यवस्था पर पड़ रहा है। कई जगह सड़कें पानी में डूबने के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। बक्सर में भी बढ़ते गंगा जलस्तर और कर्मनाशा नदी के प्रभाव से कुछ संपर्क मार्गों पर पानी फैलने की रिपोर्ट है। ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए जोखिम लेकर जलमग्न रास्तों से गुजरना पड़ रहा है।

दियारा क्षेत्रों में सड़क और पुल-पुलियों का संपर्क बाधित होने से लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन सहायता तक पहुंच को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर प्रभावित पंचायतों में सरकारी नाव और राहत व्यवस्था बढ़ाने की मांग उठ रही है।

प्रशासन की निगरानी बढ़ी

नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और जल संसाधन विभाग की निगरानी बढ़ाई गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से नदी और तेज बहाव वाले पानी के करीब जाने से बचने तथा स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है। आने वाले दिनों में जलस्तर और बढ़ता है या घटता है, इसी पर दियारा क्षेत्रों में स्थिति की गंभीरता काफी हद तक निर्भर करेगी।

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