
पटना: बिहार के ग्रामीण इलाकों में उफनाई नदियों और भीषण जलभराव ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कई जिलों में खेतों में महीनों की मेहनत से तैयार धान, मक्का और सब्जियों की फसलें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। पानी का स्तर लगातार बने रहने से फसलें सड़ने लगी हैं, जिससे अन्नदाताओं के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
खेत जलमग्न, खाद और बीज की लागत डूबी उत्तरी और मध्य बिहार के निचले ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का पानी पिछले कई दिनों से जमा है। किसानों ने कर्ज और बचत के पैसों से महंगे बीज, उर्वरक और कीटनाशक लगाकर जो फसल बोई थी, वह अब पानी के नीचे नष्ट हो रही है।
- धान और सब्जियों का भारी नुकसान: धान की रोपाई के बाद जलभराव होने से पौधे गल रहे हैं। वहीं, मिर्च, गोभी और अन्य नकदी सब्जियों की फसल पूरी तरह चौपट हो चुकी है।
- मवेशियों के लिए चारे का संकट: बाढ़ के कारण हरे चारे का अकाल पड़ गया है, जिससे पशुपालकों और किसानों के सामने अपने मवेशियों को बचाने की नई चुनौती खड़ी हो गई है।
किसानों ने की मुआवजे और कृषि ऋण माफी की मांग फसलों के बड़े पैमाने पर नुकसान के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने राज्य सरकार से फसल क्षति का त्वरित आकलन (क्रॉप असेसमेंट) कराने की मांग की है। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार तुरंत विशेष राहत पैकेज जारी करे और प्रभावित किसानों को इनपुट सब्सिडी तथा केसीसी (KCC) ऋण में राहत प्रदान करे ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें।













