1. ग्रामीण इलाकों में बहुमंजिला मकानों के लिए नया नियम
- जिला स्तरीय अनुमति अनिवार्य: शहरों से सटे ग्रामीण इलाकों में अनियंत्रित निर्माण को रोकने के लिए पंचायती राज विभाग नया नियम लागू कर रहा है। अब गांवों में बहुमंजिला इमारतों या अपार्टमेंट के निर्माण के लिए जिला स्तर से अनुमति और नक्शा पास (Map Approval) कराना अनिवार्य होगा।
- DDC की अध्यक्षता में कमेटी: नक्शा पास करने के लिए हर जिले में उप विकास आयुक्त (DDC) की अध्यक्षता में एक कमेटी बनेगी। इसमें जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारी शामिल होंगे।
- 2-मंजिला मकानों को छूट: साधारण ग्रामीण आवासीय मकानों (ग्राउंड फ्लोर + 2 मंजिल) तथा 500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले व्यक्तिगत निर्माण पर यह नियम लागू नहीं होगा।
- बिल्डरों पर कसगा शिकंजा (RERA की तर्ज पर): 500 वर्गमीटर से अधिक बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बिल्डरों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। खरीदारों से जुटाए गए पैसों का 70% हिस्सा अलग एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) में रखना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, निर्माण में किसी भी तरह की संरचनात्मक कमी (Fault) आने पर 5 साल तक मुफ़्त में मरम्मत करने की जिम्मेदारी भी बिल्डर की होगी।
2. भूमिहीन परिवारों को ज़मीन देने की प्रक्रिया जारी
- ‘अभियान बसेरा-2’ के तहत भूमि आबंटन: राज्य सरकार बेघर और भूमिहीन गरीब परिवारों को आवास निर्माण के लिए 3-3 डिसमिल (लगभग 1,306 वर्ग फुट) आवासीय भूमि के पर्चे दे रही है।
- आवास योजना से जुड़ाव: ज़मीन मिलने के बाद इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का मकान बनाने के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।
- 30,000 परिवारों का लक्ष्य: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के माध्यम से राज्य के करीब 30,000 योग्य भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर जमीन आबंटित करने का लक्ष्य तय किया गया है।













